झारखंड में गहराते बिजली संकट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अनियमित बिजली आपूर्ति, लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रांसफॉर्मर खराब होने और उपभोक्ता सेवाओं की बदहाल स्थिति से आम लोग परेशान हैं।
भीषण गर्मी में बढ़ी लोगों की परेशानी
रघुवर दास ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों से लगातार बिजली कटौती की शिकायतें मिल रही हैं। इसका असर शिक्षा, कृषि, व्यापार और उद्योग पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में विकसित आधारभूत ढांचे का सही रखरखाव नहीं हो पा रहा है।
अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जहां केवल 38 लाख घरों तक बिजली पहुंची थी, वहीं उनकी सरकार ने 68 लाख परिवारों तक बिजली उपलब्ध कराई। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में 4027 किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइन और 1.41 लाख किलोमीटर से अधिक वितरण लाइन बिछाई गई। इसके अलावा कई नए ग्रिड और पावर सब-स्टेशन बनाए गए तथा शहरी क्षेत्रों में अंडरग्राउंड केबलिंग और वितरण प्रणाली को मजबूत किया गया।
पतरातू परियोजना का भी किया जिक्र
रघुवर दास ने पतरातू थर्मल पावर स्टेशन और पीवीयूएनएल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि एनटीपीसी के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए लगभग 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार की पहल से झारखंड ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा।
सरकार से की ये मांगें
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने, खराब ट्रांसफॉर्मरों को जल्द बदलने, लो-वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या दूर करने तथा उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है।
