ईचागढ़ में गहराया हाथी-मानव संघर्ष, दो माह में 5 मौतों से बढ़ी चिंता

ईचागढ़ में गहराया हाथी-मानव संघर्ष, दो माह में 5 मौतों से बढ़ी चिंता

Johar News Times
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11 घरों को हाथियों ने किया क्षतिग्रस्त, राहत व्यवस्था और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,

सरायकेला: ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हाथी-मानव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। बीते दो महीनों के दौरान हाथियों के हमले में पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई गांवों में फसलों और मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। ताजा घटनाओं के बाद क्षेत्र में वन विभाग की तैयारियों, राहत व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

हाल ही में मौसाडा-कालीचमदा स्वर्णरेखा परियोजना विस्थापित क्षेत्र में हाथियों के झुंड ने एक ही रात में 11 घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि घटना के बाद राहत सामग्री और सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं रही। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष देखने को मिला।

सूत्रों के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में रहने के कारण राहत सामग्री के वितरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बावजूद प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण तत्काल सहायता पहुंचाने में कठिनाई हुई। इसका खामियाजा मौके पर मौजूद वनरक्षियों को लोगों की नाराजगी के रूप में भुगतना पड़ा।

क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जंगलों पर बढ़ते दबाव, अवैध खनन और वन क्षेत्रों में लगातार हो रहे बदलावों के कारण हाथियों के पारंपरिक मार्ग प्रभावित हुए हैं। इसके चलते हाथियों का रुख आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल राहत सामग्री वितरण से समस्या का समाधान संभव नहीं है। हाथियों के सुरक्षित कॉरिडोर, त्वरित चेतावनी प्रणाली, पर्याप्त राहत संसाधन, ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था तथा अवैध खनन पर प्रभावी रोक जैसे उपायों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

लगातार बढ़ रही मौतों और नुकसान के बीच ईचागढ़ के लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि हाथी-मानव संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए सरकार, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर ठोस एवं दीर्घकालिक रणनीति तैयार करें।

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