अल नीनो का बढ़ा खतरा, सितंबर तक कम हो सकती है बारिश; कई राज्यों में सूखे जैसे हालात की आशंका

अल नीनो का बढ़ा खतरा, सितंबर तक कम हो सकती है बारिश; कई राज्यों में सूखे जैसे हालात की आशंका

Johar News Times
3 Min Read

नई दिल्ली : प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने से भारत में मानसून और कृषि को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार सितंबर के अंत तक अल नीनो और मजबूत हो सकता है, जिससे देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि जुलाई, अगस्त और सितंबर की शुरुआत तक अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा, लेकिन सितंबर के अंत तक इसके मजबूत होने की संभावना है। इसके चलते उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम हो सकती है।

विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान, ओडिशा, उत्तरी आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के उन इलाकों में अधिक असर पड़ सकता है जहां सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों, खासकर धान, दाल, मक्का और मूंगफली की खेती प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इसका असर वैश्विक मौसम चक्र पर पड़ता है और भारत में मानसून कमजोर हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष स्थिति ‘सुपर अल नीनो’ का रूप ले सकती है। हालांकि आईएमडी ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। विभाग का कहना है कि मौसम संबंधी सूचनाओं और चेतावनियों के आधार पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

इस बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी भरोसा दिलाया है कि स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख जलाशयों में इस समय जलस्तर सामान्य से बेहतर है, जो खरीफ फसलों के लिए राहत देने वाला कारक साबित होगा। सरकार ने कम बारिश की आशंका वाले राज्यों और जिलों के लिए विशेष निगरानी और कार्ययोजना भी तैयार की है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो के कारण सूखे जैसी स्थिति बनती है तो इसका असर कृषि उत्पादन, महंगाई और देश की आर्थिक वृद्धि दर पर पड़ सकता है। इसके अलावा कई हिस्सों में हीटवेव की घटनाएं बढ़ने की भी आशंका है।

Share This Article