ईरान-अमेरिका शांति समझौता : 14 सूत्रीय डील से खुलेगा होर्मुज, तेल कीमतों में राहत की उम्मीद; भारत को भी होगा बड़ा फायदा

ईरान-अमेरिका शांति समझौता : 14 सूत्रीय डील से खुलेगा होर्मुज, तेल कीमतों में राहत की उम्मीद; भारत को भी होगा बड़ा फायदा

Johar News Times
5 Min Read

पश्चिम एशिया में पिछले 107 दिनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति समझौते का रास्ता साफ होता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस डील को लेकर सबसे अधिक चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने को लेकर हो रही है। हालांकि समझौते के कई बिंदुओं को लेकर अभी दोनों देशों की ओर से औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ईरानी मीडिया में सामने आए मसौदे के अनुसार यह 14 सूत्रीय समझौता पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकता है।

समझिए 14 सूत्रीय शांति समझौते के प्रमुख बिंदु

  1. ईरान के साथ सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई और युद्ध तत्काल समाप्त किया जाएगा।
  2. अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
  3. 30 दिनों के भीतर ईरान पर लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी।
  4. अमेरिका ईरान के आसपास से अपनी अतिरिक्त सैन्य मौजूदगी कम करेगा।
  5. ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल देगा।
  6. तेल, पेट्रोकेमिकल और संबंधित निर्यातों पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी।
  7. ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की सहायता योजना पर काम होगा।
  8. अगले 60 दिनों में परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम वार्ता होगी।
  9. ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराएगा।
  10. ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी।
  11. समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाएगा।
  12. अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने का प्रयास होगा।
  13. ईरान का कहना है कि उसकी संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा जारी होने के बाद ही अंतिम वार्ता आगे बढ़ेगी।
  14. अंतिम दौर की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। तनाव बढ़ने के कारण हाल के महीनों में तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब इसके खुलने की संभावना से वैश्विक बाजार में राहत का माहौल है।

24 अरब डॉलर की संपत्ति लौटाने पर सहमति
समझौते के मसौदे के अनुसार अमेरिका ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमत हुआ है। इसके साथ ही ईरान ने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को कम करने पर भी सैद्धांतिक सहमति जताई है। इस विषय पर अगले 60 दिनों में विस्तृत बातचीत होगी।

भारत पर क्या होगा असर?
यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो भारत को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने और तेल आपूर्ति सामान्य होने से कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। इसका असर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा भारत का पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापार अधिक सुगम होगा। समुद्री माल ढुलाई की लागत घटने से आयात-निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक, उर्वरक, परिवहन और विमानन क्षेत्रों को भी राहत मिल सकती है। यदि तेल सस्ता होता है तो महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और कई उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अब 19 जून की बैठक पर टिकी निगाहें
दुनिया की नजर अब 19 जून को जेनेवा में होने वाली बैठक पर है। यदि दोनों पक्ष अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है। वहीं किसी भी पक्ष के पीछे हटने की स्थिति में क्षेत्र में फिर से अस्थिरता बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी। फिलहाल इस संभावित समझौते को वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Share This Article