पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड के पत्थरबासा गांव में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार की देर रात जंगली हाथियों के एक बड़े झुंड ने गांव में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान हाथियों ने एक स्थानीय ग्रामीण पुरंदर नायक के मिट्टी के मकान को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया और घर के अंदर रखा करीब 50 किलो धान चट कर गए। इस घटना के बाद से पूरे इलाके के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
देर रात गांव में घुसा हाथियों का झुंड, मशाल जलाकर ग्रामीणों ने खदेड़ा
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, देर रात अचानक हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्र में दाखिल हो गया। झुंड ने कई जगहों पर फसलों को नुकसान पहुंचाया। इसी बीच, हाथियों ने पुरंदर नायक के कच्चे मकान को निशाना बनाया और उसकी दीवारें ढहा दीं। घर की दीवार टूटने और हाथियों की चिंघाड़ सुनकर ग्रामीण सहम गए।
अपनी जान बचाने और हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर शोर मचाना शुरू किया और पारंपरिक तरीके से मशालें जलाकर व पटाखे फोड़कर हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद हाथियों के झुंड को गांव की सीमा से बाहर खदेड़ा जा सका। गनीमत यह रही कि इस हमले में किसी भी ग्रामीण को चोट नहीं आई और जान-माल का बड़ा नुकसान टल गया।
वन विभाग ने शुरू की मुआवजे की प्रक्रिया
सोमवार की सुबह घटना की आधिकारिक सूचना मिलते ही वनरक्षी अभिषेक प्रधान प्रभावित गांव पत्थरबासा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर नुकसान का जायजा लिया। वनरक्षी ने पीड़ित पुरंदर नायक को सरकारी मुआवजे के लिए आवश्यक फॉर्म उपलब्ध कराया और मामले को तुरंत ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया।
स्थायी समाधान की मांग
क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे हाथी-मानव द्वंद्व को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और डर है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि:
- हाथियों के आतंक से उन्हें स्थायी राहत दिलाई जाए।
- प्रभावित इलाकों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाई जाए।
- पीड़ित परिवार को मकान और अनाज के नुकसान का शीघ्र मुआवजा दिया जाए।
दूसरी ओर, वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि सरकारी नियमानुसार जल्द से जल्द क्षतिपूर्ति की राशि पीड़ित परिवार को सौंप दी जाएगी।
