जमशेदपुर: 1932 के खतियान की जमीन पर कब्जे का आरोप, न्याय की गुहार लेकर उपायुक्त दफ्तर पहुंची बुजुर्ग महिला

"खतियानी जमीन पर माफिया का साया: जमशेदपुर में 1932 के खतियान को आधार बना बुजुर्ग महिला ने मांगी सुरक्षा।"

Johar News Times
3 Min Read

झारखंड में 1932 के खतियान को लेकर जहां एक तरफ सियासी सरगर्मियां तेज रहती हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी खतियानी जमीन से जुड़े विवाद का एक गंभीर मामला जमशेदपुर से सामने आया है। बिरसानगर निवासी 68 वर्षीय वृद्ध महिला सुकुरमनी हांसदा ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को आवेदन सौंपकर अपनी पुश्तैनी रैयती भूमि पर कथित अवैध कब्जा और निर्माण कार्य की शिकायत की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर अपनी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की गुहार लगाई है।

1932 के खतियान बनाम 1964 का सर्वे सेटलमेंट

सुकुरमनी हांसदा का दावा है कि मानापीटा मौजा स्थित उनकी पुश्तैनी भूमि वर्ष 1932 के सर्वे खतियान में उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1964 के सर्वे सेटलमेंट के दौरान कथित रूप से हेरफेर और गलत तरीके से इस कीमती भूमि को अन्य लोगों के नाम पर दर्ज करा दिया गया।

जमीन का पूरा ब्योरा: आवेदन के अनुसार, मौजा मानापीटा के खाता संख्या 34, प्लॉट संख्या 25 और 26 की कुल 53 डिसमिल भूमि 1932 के मूल खतियान में दर्ज थी। बाद में खाता संख्या 166, प्लॉट संख्या 119 के तहत 52 डिसमिल भूमि का रिकॉर्ड बदल दिया गया।

भू-माफियाओं के गठजोड़ का आरोप, मिल रही है धमकी

बुजुर्ग महिला ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव के ही कुछ रसूखदार लोगों ने भूमि माफियाओं के साथ मिलकर उनकी इस विवादित जमीन पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है और वहां धड़ल्ले से अवैध निर्माण कार्य कराया जा रहा है। सुकुरमनी का कहना है कि जब भी वह या उनका परिवार इसका विरोध करने जाता है, तो उनके साथ गाली-गलौज की जाती है और उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकीं नजरें

पीड़ित महिला ने उपायुक्त से मांग की है कि विवादित भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवाया जाए। साथ ही, वर्ष 1932 के मूल खतियान के आधार पर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा बताते हुए उन्होंने बिरसानगर थाना को सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक निर्देश देने का भी आग्रह किया है।

महिला ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए आवेदन के साथ 1932 के खतियान की प्रति और अन्य संबंधित सरकारी दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। अब देखना यह है कि इस संवेदनशील मामले पर जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है।

Share This Article