देश की शिक्षा व्यवस्था को रोजगारपरक और तकनीकी रूप से अपग्रेड करने के लिए केंद्र सरकार बड़े कदम उठाने जा रही है। ‘विश्व युवा कौशल दिवस’ के खास अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल स्तर से ही कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने और इसका रोडमैप तैयार करने पर गहन चर्चा हुई।
इस बैठक में शिक्षा मंत्रालय और भोपाल स्थित ‘पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान’ के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
साल में 10 दिन ‘बैगलेस डे’ और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
बैठक में छात्रों के बस्ते का बोझ कम करने और उन्हें व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए:
- साल में 10 दिन ऐसे होंगे जब छात्र बिना किताबों के स्कूल आएंगे। इन दिनों में छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण , उद्योग भ्रमण और कार्यस्थल का व्यावहारिक अनुभव कराया जाएगा।
- आयु और कक्षा के अनुरूप विशेष कौशल पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे और छात्रों की इस स्किल एजुकेशन को उनके अकादमिक क्रेडिट से जोड़ा जाएगा।
- शिक्षा मंत्री ने बड़े पैमाने पर कौशल शिक्षा को लागू करने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंटेंट के उपयोग पर विशेष बल दिया।
सिर्फ परीक्षा नहीं, भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होंगे छात्र
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल परीक्षा केंद्रित रट्टू तोता बनाना नहीं है। इसका असली मकसद युवाओं को रोजगार, उद्यमिता और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए पूरी तरह सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।
इसके लिए उन्होंने मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता बढ़ाने और छात्रों के लिए इंटर्नशिप के अधिक से अधिक अवसर पैदा करने के निर्देश दिए।
PSSCIVE को मिले नए निर्देश, बदलेगा शिक्षा का ढांचा
बैठक के दौरान PSSCIVE संस्थान की भूमिका की भी समीक्षा की गई। संस्थान को निर्देश दिया गया है कि वह राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करे ताकि देश के हर कोने में स्किल एजुकेशन का मॉडल मजबूत हो सके। इसके साथ ही, अब शिक्षा व्यवस्था में खेल, कला और कौशल के एकीकरण पर जोर दिया जाएगा, जिससे छात्रों का बहुआयामी विकास हो सके।
