रांची : झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत बने आवासों को लेकर बड़े स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। झारखंड सामाजिक अंकेक्षण सोसाइटी ने राज्य के 16 जिलों की 769 पंचायतों में 1,09,805 आवासों और लाभुकों का सामाजिक अंकेक्षण पूरा कर लिया है। अब अगले चरण में पंचायत और प्रखंड स्तर पर जनसुनवाई के जरिए यह जांच की जाएगी कि योजना का लाभ सही पात्रों तक पहुंचा या नहीं, आवास समय पर बने या नहीं और निर्माण व भुगतान प्रक्रिया में कहीं अनियमितता तो नहीं हुई।
ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश पर यह राज्य की अब तक की सबसे बड़ी निगरानी प्रक्रिया मानी जा रही है। अंकेक्षण के दौरान लाभुक चयन, भुगतान, मजदूरी, आवास निर्माण की गुणवत्ता, शौचालय निर्माण, बिजली कनेक्शन, पेयजल सुविधा और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ की भी जांच की गई है।
अंकेक्षण टीम को पंचायत स्तर पर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनमें स्थायी प्रतीक्षा सूची, वार्षिक चयन सूची, ग्रामसभा की कार्यवाही, मस्टर रोल, भुगतान आदेश, लाभुकों के बैंक भुगतान रिकॉर्ड, आवास निर्माण की पांच चरणों की तस्वीरें तथा उज्ज्वला, सौभाग्य, शौचालय और पेयजल योजनाओं से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
टीम यह भी जांच करेगी कि जिन लाभुकों को आवास स्वीकृत हुआ, क्या वे वास्तव में पात्र थे या नहीं। इसके साथ ही निर्माण कार्य अधूरा छोड़ने, राशि भुगतान में देरी, बिचौलियों की भूमिका और पंचायत स्तर पर हुई गड़बड़ियों की भी पड़ताल होगी।
निर्देश के अनुसार पहले पंचायत स्तर पर जनसुनवाई होगी, जिसमें ग्रामीण, लाभुक, वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत सचिव, आवास मित्र और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं शामिल रहेंगी। इसके बाद प्रखंड स्तर पर दूसरी जनसुनवाई होगी, जहां पंचायत स्तर पर लंबित मामलों और गंभीर शिकायतों की समीक्षा की जाएगी तथा जिन मामलों का समाधान पंचायत स्तर पर नहीं हो सकेगा, उन पर प्रशासनिक निर्णय लिया जाएगा।
कार्यक्रम के अनुसार कई जिलों में जनसुनवाई का कैलेंडर पहले ही जारी हो चुका है। बोकारो के चंदनकियारी में 29 मई, चतरा के प्रतापपुर में 29 मई, देवघर के सारठ और मोहनपुर में मई के मध्य, जबकि धनबाद के टुंडी, पूर्वी टुंडी, निरसा, कलियासोल और तोपचांची में 20 से 22 मई तक जनसुनवाई हो रही है। गढ़वा जिले के कांडी, केतार, मंझिआंव, मेराल, रमकंडा, रमना और रंका में 29 मई से 10 जून तक कार्यक्रम तय है, वहीं रांची के कांके और लापुंग में भी सुनवाई निर्धारित की गई है।
इस पूरे सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य योजना की वास्तविक जमीनी तस्वीर सामने लाना है। इससे लाभुक चयन में गड़बड़ी, भुगतान में अनियमितता, अधूरे आवास और अन्य शिकायतों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होगा तथा पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा।
