सरायकेला: ‘नियम सिर्फ झोपड़ी पर नहीं, महलों पर भी लागू हों’, दलमा इको सेंसिटिव जोन में दोहरे मापदंड पर भड़का ग्राम सभा सुरक्षा मंच

कानून सिर्फ झोपड़ी पर नहीं, महलों पर भी लागू हो!

Johar News Times
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दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच, झारखंड के सक्रिय सदस्य गुरचरण कर्मकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ईको सेंसिटिव जोन में नियमों के दोहरे मापदंड पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि क्या पर्यावरण संरक्षण के नियम सभी पर समान रूप से लागू हो रहे हैं?

कर्मकार ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि दलमा तराई क्षेत्र जैसे संवेदनशील इलाके प्रकृति, वन्यजीव और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए बने हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण, खनन और व्यावसायिक गतिविधियों पर सख्त नियम हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जब कोई गरीब परिवार जंगल किनारे छोटी झोपड़ी बनाता है या जीवनयापन के लिए कोई छोटा काम करता है, तो प्रशासन और वन विभाग तुरंत जुर्माना, केस और नोटिस लेकर पहुंच जाता है। गरीबों में कानून का डर पैदा कर दिया जाता है।

इसके विपरीत, बड़े कॉरपोरेट घरानों, प्रभावशाली लोगों और पैसे वालों के लिए यही कानून अक्सर कमजोर पड़ जाते हैं। ईको सेंसिटिव जोन के तहत आने वाले चांडिल, नीमडीह और पटमदा क्षेत्र में कई जगह पहाड़ों की कटाई और जंगल के भीतर अवैध रूप से बड़े-बड़े भवन, रिसॉर्ट और कॉलोनियों का निर्माण वर्षों से चल रहा है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

गुरचरण कर्मकार ने आरोप लगाया कि दलमा अभयारण्य से सटे इलाकों में हाथी कॉरिडोर को बाधित कर अवैध खनन और निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी हैं। वहीं दूसरी ओर, वनाधिकार कानून 2006 की अनदेखी कर ग्राम सभा की अनुमति लिए बिना ही बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी दी जा रही है।

  1. ईको सेंसिटिव जोन में चल रहे सभी अवैध व्यावसायिक निर्माण और खनन की उच्च स्तरीय जांच हो।
  2. पर्यावरण से जुड़े कानून गरीब और अमीर, दोनों पर एक समान लागू किए जाएं।
  3. वनाधिकार कानून 2006 के तहत किसी भी परियोजना के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य हो।
  4. जीवनयापन के लिए जंगल पर निर्भर गरीब-आदिवासी परिवारों का उत्पीड़न तुरंत बंद किया जाए।

कर्मकार ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह दोहरा रवैया नहीं बदला, तो दलमा तराई क्षेत्र की ग्राम सभाएं एकजुट होकर उग्र आंदोलन को मजबूर होंगी। उन्होंने कहा, “प्रकृति सबकी है तो नियम भी सबके लिए एक होने चाहिए। कानून सिर्फ झोपड़ी पर नहीं, महलों पर भी लागू हो।”

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