मेंटल हेल्थ का संकट: हर दिन 42 मौतें, डिप्रेशन और तनाव बनी बड़ी चुनौती; एक्सपर्ट्स से जानें शुरुआती लक्षण

मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) आज देश के सामने एक मूक महामारी की तरह उभर रहा है।

Johar News Times
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मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) आज देश के सामने एक मूक महामारी की तरह उभर रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के चौंकाने वाले आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अवसाद और मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या के मामलों में डराने वाली बढ़ोतरी हुई है। यह स्थिति केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि एक गहरे मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है।

डरा रहे हैं आंकड़े: रोज 42 सुसाइड

NCRB के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में एक साल के भीतर 15,491 लोगों ने आत्महत्या की। इसका मतलब है कि राज्य में औसतन हर दिन 42 लोगों ने अपनी जान गंवाई

छात्रों और युवाओं पर सबसे ज्यादा असर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, युवाओं और छात्रों में बढ़ता तनाव इस संकट की सबसे बड़ी वजह है।

  • देश में तीसरा स्थान: छात्र आत्महत्या के मामलों में मध्य प्रदेश पूरे देश में तीसरे नंबर पर है।
  • 10% हिस्सेदारी: देश भर में होने वाली कुल छात्र आत्महत्याओं में अकेले 10 फीसदी हिस्सेदारी मध्य प्रदेश की है।
  • छात्राओं पर अधिक दबाव: चौंकाने वाली बात यह है कि लड़कों के मुकाबले लड़कियां इस मानसिक दबाव का शिकार ज्यादा हो रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 731 छात्राओं और 716 छात्रों ने मौत को गले लगाया।

तनाव की मुख्य वजहें: प्रतियोगी परीक्षाओं का भारी दबाव, करियर को लेकर अनिश्चितता, सामाजिक अपेक्षाएं और भावनात्मक अकेलापन युवाओं को इस दलदल में धकेल रहा है।

अचानक नहीं होता सुसाइड, पहचानें ये ‘वार्निंग साइंस’

हेल्थ एक्सपर्ट्स का स्पष्ट कहना है कि आत्महत्या कभी भी अचानक लिया गया फैसला नहीं होता। इसके पीछे लंबे समय से चल रहा डिप्रेशन, चिंता (Anxiety) और इमोशनल संघर्ष होता है। अगर आपके आस-पास किसी में ये लक्षण दिखें, तो तुरंत सतर्क हो जाएं:

  • बातचीत में बदलाव: बार-बार मौत, सुसाइड या खुद को नुकसान पहुंचाने की बातें करना।
  • अत्यधिक बेचैनी: हर समय भारी चिंता, घबराहट या चिड़चिड़ापन महसूस करना।
  • लो-कॉन्फिडेंस: खुद को बेकार, लाचार या दूसरों पर बोझ समझना।
  • अकेलापन: अचानक दोस्तों, परिवार और सोशल लाइफ से पूरी तरह दूरी बना लेना।
  • व्यवहार में बदलाव: अपनी पसंदीदा और कीमती चीजें दूसरों को बिना वजह सौंपने लगना।

बचाव के उपाय: कैसे संवरेगा मानसिक स्वास्थ्य?

डॉक्टरों के अनुसार, सही समय पर मेडिकल सहायता और इमोशनल सपोर्ट मिलकर कई जिंदगियां बचा सकते हैं। लाइफस्टाइल में ये छोटे बदलाव बड़े मददगार साबित हो सकते हैं:

  1. खुलकर बात करें: अपने दिल की बात परिवार या भरोसेमंद दोस्तों से न छुपाएं।
  2. स्क्रीन टाइम कम करें: सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से दूरी बनाएं।
  3. हेल्दी रूटीन: 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें और नियमित व्यायाम (Yoga/Exercise) करें।
  4. काउंसलिंग की मदद: समस्या बढ़ने पर किसी थेरेपिस्ट या साइकियाट्रिस्ट से मिलने में संकोच न करें।

अब क्या कदम उठाने की है जरूरत?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

  • स्कूल और कॉलेजों में अनिवार्य रूप से काउंसलिंग सुविधाएं होनी चाहिए।
  • गांवों और छोटे कस्बों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर ट्रेनड मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की तैनाती हो।
  • बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाकर मानसिक तनाव को ‘taboo’ (Taboo) या कलंक मानने की सोच को बदलना होगा।

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