हम रोज़ जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह न केवल हमारे फेफड़ों (Lungs) और दिल (Heart) को बीमार कर रही है, बल्कि हमारे दिमाग को भी भारी नुकसान पहुंचा रही है। एक हालिया वैज्ञानिक शोध में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वायु प्रदूषण के कारण लोगों की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता (Cognitive Function) तेजी से कमजोर हो रही है।
क्या सच में दिमाग को डैमेज कर रहा है प्रदूषण?
इस रिसर्च में करीब 7,000 मध्यम आयु वर्ग के लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने हवा में मौजूद PM2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों के लंबे समय तक रहने वाले असर का अध्ययन किया।
- कमजोर याददाश्त: जिन इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर अधिक था, वहां रहने वाले लोगों का प्रदर्शन याददाश्त, समझने की क्षमता और मानसिक गति (Mental Speed) से जुड़े टेस्ट में काफी कमजोर पाया गया।
- कम प्रदूषण भी खतरनाक: सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि यह बुरा असर उन क्षेत्रों में भी देखा गया, जहां वायु प्रदूषण का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ‘सुरक्षित’ या ‘कम’ माना जाता है।
- साइलेंट डैमेज: दिमाग में होने वाले ये नुकसान कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों पहले ही शुरू हो जाते हैं।
ट्रैफिक के धुएं से महिलाओं के दिमाग को अधिक खतरा
रिसर्च में यह भी साफ हुआ है कि ट्रैफिक, फैक्ट्रियों और जंगलों की आग से निकलने वाला धुआं सबसे ज्यादा नुकसानदेह है।
MRI स्कैन में दिखे सबूत: ट्रैफिक से पैदा होने वाले प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों के ब्रेन का जब MRI स्कैन किया गया, तो उसमें सूक्ष्म क्षति (Microscopic Damage) के संकेत मिले। वैज्ञानिकों के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं के दिमाग पर यह दुष्प्रभाव और अधिक स्पष्ट देखा गया।
खास बात यह है कि रिसर्चर्स ने हाई बीपी, डायबिटीज और मोटापे जैसे रिस्क फैक्टर्स को अलग रखकर भी देखा, तब भी वायु प्रदूषण का दिमागी डैमेज से सीधा संबंध पाया गया।
अचानक नहीं होता डिमेंशिया
“डिमेंशिया या भूलने की बीमारी अचानक नहीं होती। यह कई दशकों में धीरे-धीरे विकसित होती है। ऐसे में वायु प्रदूषण जैसे कारकों की पहचान करना बेहद जरूरी है जो शुरुआती चरण में ही दिमाग को नुकसान पहुंचा रहे हैं, ताकि भविष्य में ब्रेन हेल्थ की सुरक्षा की जा सके।” वहीं, इस अध्ययन की प्रमुख लेखक असिस्टेंट प्रोफेसर सैंडी अज़ाब का कहना है कि कनाडा की हवा को आमतौर पर साफ माना जाता है, लेकिन हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि स्वच्छ हवा के बीच रहने के बावजूद कम स्तर का वायु प्रदूषण भी ब्रेन हेल्थ को प्रभावित कर सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय: स्वच्छ हवा ही एकमात्र बचाव
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के और लंबे अध्ययन यह समझने में मदद करेंगे कि स्वच्छ हवा किस तरह हमारे दिमाग और याददाश्त को बूढ़ा होने से बचा सकती है। फिलहाल, प्रदूषण के इस दौर में मास्क का उपयोग करना, घरों में एयर प्यूरीफायर लगाना और ज्यादा ट्रैफिक वाले इलाकों में जाने से बचना ही खुद को सुरक्षित रखने के कुछ उपाय हैं।
