चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम के झींकपानी स्थित ACC सीमेंट प्लांट को स्थायी रूप से बंद किए जाने की घोषणा से क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। करीब 80 वर्षों से संचालित यह औद्योगिक इकाई स्थानीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख आधार रही है। प्लांट बंद होने से 74 स्थायी कर्मचारियों समेत बड़ी संख्या में ठेका मजदूर प्रभावित होंगे और लगभग 1600 परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इसका असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। झींकपानी और आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था लंबे समय से इस उद्योग पर निर्भर है। अनुमान है कि करीब 50 हजार लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकती है। इससे स्थानीय व्यापार, परिवहन और सेवा क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा।
कंपनी ने प्लांट बंद करने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं। सीमेंट निर्माण के लिए आवश्यक चूना पत्थर का स्थानीय भंडार लगभग समाप्त हो चुका है, कच्चे माल की कमी से उत्पादन लागत बढ़ गई है और वर्ष 1946 में स्थापित प्लांट की मशीनें व तकनीक अब पुरानी हो चुकी हैं। कंपनी ने स्थायी कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन और मुआवजा देने का आश्वासन दिया है, लेकिन ठेका मजदूरों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
आज़ादी से पहले स्थापित इस ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई की संभावित बंदी को क्षेत्र के लोग झारखंड के औद्योगिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अंत के रूप में देख रहे हैं। अब सभी की नजर सरकार, जनप्रतिनिधियों और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी है।
