सरायकेला: सरकारी नौकरी की लंबी प्रतीक्षा और लगातार निराशा के बाद सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत रसुनिया पंचायत के माझीडीह गांव निवासी सुखदेव महतो ने स्वरोजगार की राह चुनकर क्षेत्र के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। स्नातक शिक्षित सुखदेव ने पारंपरिक खेती को आधुनिक बागवानी और पोल्ट्री व्यवसाय से जोड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि चार अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है।
सुखदेव महतो बताते हैं कि उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद वर्ष 2022 में खेती को ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से बैंक से ऋण प्राप्त किया और अपनी पुश्तैनी जमीन पर बागवानी परियोजना शुरू की।
करीब तीन एकड़ भूमि में उन्होंने आम की उन्नत किस्मों के साथ-साथ अमरूद, नींबू और पपीता के पौधे लगाए हैं। वर्तमान में पौधे अच्छी तरह विकसित हो चुके हैं और उत्पादन भी शुरू हो गया है। बागवानी के साथ उन्होंने पोल्ट्री फार्म की भी स्थापना की, जहां मौसम के अनुसार हजारों चूजों का पालन किया जाता है।
अपने उत्पादों की बिक्री के लिए सुखदेव स्थानीय बाजारों, हाटों और चांडिल क्षेत्र के विभिन्न व्यापारिक केंद्रों तक स्वयं पहुंचते हैं। इससे उन्हें बेहतर आमदनी मिल रही है और व्यवसाय का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।
विशेष बात यह है कि माझीडीह गांव हाथी प्रभावित क्षेत्र में आता है, जहां जंगली हाथियों से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद सुखदेव ने हिम्मत नहीं हारी और खेती को आगे बढ़ाने के लिए सुरक्षा उपायों पर भी काम कर रहे हैं।
सुखदेव महतो की यह पहल आज क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। उनका मानना है कि यदि युवाओं को कृषि और स्वरोजगार के क्षेत्र में उचित प्रशिक्षण व सरकारी सहयोग मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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