स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और उलगुलान के प्रणेता भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि के मौके पर आज सरायकेला जिले में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यक्रम सरायकेला के बिरसा चौक और समाहरणालय परिसर में हुआ, जहां जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने भगवान बिरसा मुंडा को याद करते हुए उनके चित्र और प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे ‘धरती आबा’
श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा:
“भगवान बिरसा मुंडा जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महान प्रतीक थे। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के शोषण और अन्याय के खिलाफ जो ऐतिहासिक संघर्ष किया, उसने समाज को आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीने का रास्ता दिखाया। उनके विचार और आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।”
वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं बिरसा मुंडा के विचार
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन त्याग, संघर्ष, जनजागरण और सामाजिक चेतना का एक अद्वितीय उदाहरण है। प्रकृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और समाज के वंचित व कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के प्रति उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। उनके दिखाए रास्ते आज की युवा पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराते हैं।
मौके पर जिला प्रशासन के कई अधिकारी रहे मौजूद
इस गरिमामयी और संवेदनशील अवसर पर उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह और अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार के अलावा जिला प्रशासन के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी, समाहरणालय के कर्मचारी और स्थानीय गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित थे। सभी ने बारी-बारी से प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर ‘धरती आबा’ अमर रहें के नारे लगाए।
