झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच मंगलवार को एक बड़ा और दिलचस्प सियासी उलटफेर सामने आया है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भारतीय जनता पार्टी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी के नामांकन पत्र पर तीन गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने उनके पर्चे को फिलहाल होल्ड पर रख दिया है। दूसरी ओर, झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के नामांकन पत्र जांच में पूरी तरह सही पाए गए हैं।
कांग्रेस उम्मीदवार ने खड़े किए सवाल, चुनाव आयोग तक पहुंचा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, नामांकन पत्रों की स्क्रुटनी के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा ने परिमल नथवानी के हलफनामे और नामांकन में कथित कमियों व त्रुटियों को लेकर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन अधिकारियों ने नथवानी के पर्चे की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भी भेज दी है।
परिमल नथवानी के नामांकन में फंसीं ये 3 प्रमुख आपत्तियां:
1. नाम की विसंगति : पहली आपत्ति उम्मीदवार के नाम के प्रारूप को लेकर है। बताया जा रहा है कि नामांकन पत्र के कुछ हिस्सों में नाम “परिमल नथवानी” और कुछ जगहों पर “नथवानी परिमल” लिखा गया है। हालांकि, चुनावी मामलों के जानकार इसे एक सामान्य तकनीकी त्रुटि मान रहे हैं।
2. परिवार संबंधी कॉलम का अधूरा होना: दूसरी और सबसे गंभीर आपत्ति यह है कि नामांकन पत्र में उम्मीदवार के परिवार से संबंधित एक महत्वपूर्ण कॉलम को अधूरा छोड़ दिया गया है या वह गायब है। कांग्रेस की लीगल टीम ने इसी मुद्दे को सबसे मजबूती से उठाया है।
3. आपराधिक और सजा विवरण वाले कॉलम में चूक: तीसरी आपत्ति आपराधिक मामलों के ब्योरे से जुड़ी है। चुनावी नियमों के मुताबिक, यदि किसी उम्मीदवार पर कोई आपराधिक मामला नहीं है या सजा नहीं हुई है, तो संबंधित कॉलम को खाली छोड़ने के बजाय स्पष्ट रूप से ‘क्रॉस’ करना अनिवार्य होता है। आरोप है कि नथवानी के फॉर्म में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
अब निर्वाचन आयोग के फैसले पर टिकीं नजरें
इन तीनों आपत्तियों के कारण परिमल नथवानी का राज्यसभा टिकट फिलहाल अधर में लटक गया है। अब सभी राजनीतिक दलों की नजरें निर्वाचन अधिकारी और चुनाव आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
चूंकि झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए मैदान में केवल तीन ही उम्मीदवार (बैद्यनाथ राम, प्रणव झा और परिमल नथवानी) मुख्य रूप से आमने-सामने हैं, ऐसे में यदि परिमल नथवानी का नामांकन रद्द होता है या स्वीकृत होता है— दोनों ही स्थितियों में झारखंड की सियासत का पारा चढ़ना तय है।
