जमशेदपुर: MGM अस्पताल की सुरक्षा भगवान भरोसे! 3 महीने से वेतन न मिलने पर होमगार्ड जवानों ने दी हड़ताल की चेतावनी

"जमशेदपुर: 'अगस्त से पहले नहीं मिलेगा वेतन', सुनते ही भड़के एमजीएम के होमगार्ड; महिला जवानों ने किया घेराव।"

Johar News Times
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महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तैनात होमगार्ड जवानों का धैर्य अब जवाब दे गया है। पिछले तीन महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण इन जवानों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। सोमवार को जब होमगार्ड प्रभारी दिग्विजय पांडेय ने जवानों को यह बताया कि फंड के अभाव में फिलहाल भुगतान संभव नहीं है, तो जवानों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रभारी के अनुसार, अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा से हुई बातचीत में यह साफ हुआ है कि अगस्त माह से पहले वेतन मिलने की कोई संभावना नहीं है।

महिला जवानों ने किया प्रभारी का घेराव, बयां किया अपना दर्द

यह खबर सुनते ही ड्यूटी पर तैनात महिला होमगार्ड जवानों का आक्रोश भड़क गया। ‘बी शिफ्ट’ की ड्यूटी खत्म होते ही दर्जनों महिला जवानों ने प्रभारी दिग्विजय पांडेय का घेराव किया और अपनी आपबीती सुनाई।

विरोध जताने वाली महिला जवानों (रीना मुंडा, दीपाली महतो, सोनी मार्डी, गुमी माझी, बागी मुर्मू, सरस्वती मांडी और कलावती महतो) ने कहा:

“हम सब दूर-दराज के गांवों से रोजाना किराए की गाड़ी और ऑटो से ड्यूटी करने एमजीएम आते हैं। हर दिन आने-जाने में ही करीब 200 रुपये खर्च हो जाते हैं। 3 महीने से एक रुपया नहीं मिला है। अब तक कर्ज लेकर किसी तरह घर का चूल्हा जलाया और बच्चों को पाला, लेकिन अगले दो महीने और बिना पैसों के काम करना हमारे लिए नामुमकिन है।”

दुकानदारों ने राशन देना किया बंद, हड़ताल की तैयारी

मामले को लेकर होमगार्ड जवान पंकज कुमार झा ने स्पष्ट कहा कि अब जवानों के पास आंदोलन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि स्थानीय राशन दुकानदारों ने भी जवानों को उधार सामान देना बंद कर दिया है।

जवानों का आरोप है कि एमजीएम अस्पताल जैसे संवेदनशील जगह पर 24 घंटे भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और डॉक्टरों-मरीजों की हिफाजत में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसके बावजूद उनके पेट पर लात मारी जा रही है।

अस्पताल प्रबंधन की बढ़ी चिंताएं

90 होमगार्ड जवानों के एक साथ हड़ताल पर जाने की चेतावनी से एमजीएम अस्पताल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए हैं। अगर जवान सुरक्षा ड्यूटी छोड़ते हैं, तो अस्पताल में अराजकता फैल सकती है और डॉक्टरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। फिलहाल, इस पूरे गतिरोध को सुलझाने के लिए सभी की निगाहें प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं।

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