जयपुर : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब पूरी तरह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथों में पहुंच गई है। मंगलवार देर शाम सीबीआई की टीम जयपुर स्थित स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) मुख्यालय पहुंची, जहां राजस्थान एसओजी ने अब तक की जांच से जुड़े दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी एजेंसी को सौंप दी।सीबीआई ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और सबूत नष्ट करने जैसे आरोप शामिल किए गए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स प्रिवेंशन) एक्ट 2024 की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
परीक्षा से पहले लीक हुए गोपनीय दस्तावेज
शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के अनुसार, 3 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित नीट परीक्षा से पहले ही कुछ गोपनीय दस्तावेज अवैध तरीके से प्रसारित किए गए थे। परीक्षा के बाद एनटीए को कई शिकायतें और खुफिया इनपुट मिले, जिसके बाद जांच तेज की गई। एसओजी ने पिछले कुछ दिनों में जयपुर, जमवारामगढ़, सीकर और अन्य जिलों में लगातार छापेमारी की थी। इस दौरान करीब 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सूत्रों के मुताबिक, अब इन आरोपियों को दिल्ली ले जाकर पूछताछ की जा सकती है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
‘गेस पेपर’ से जुड़े बड़े खुलासे
जांच में सामने आया है कि सीकर और झुंझुनूं के कई छात्रों को परीक्षा से दो दिन पहले ही कथित ‘गेस पेपर’ उपलब्ध करा दिया गया था। दावा किया जा रहा है कि इस पेपर के 120 से अधिक प्रश्न असली परीक्षा में पूछे गए। एसओजी की जांच 8 मई को शुरू हुई थी, जब इन जिलों से पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं। अधिकारियों के अनुसार, टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए प्रश्न पत्र फैलाया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि ‘गेस पेपर’ पहली बार 1 मई को सीकर के छात्रों में वितरित किया गया। इसमें कुल 720 अंकों में से लगभग 600 अंकों के सवाल शामिल थे और 120 से 140 प्रश्न सीधे परीक्षा में पूछे गए।
एमबीबीएस छात्र और पीजी संचालक की भूमिका जांच के दायरे में
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि यह ‘गेस पेपर’ केरल में पढ़ाई कर रहे चुरू जिले के एक एमबीबीएस छात्र ने सीकर स्थित अपने दोस्त को भेजा था। इसके बाद एक पीजी आवास संचालक के जरिए यह सामग्री छात्रों और कोचिंग सलाहकारों तक पहुंची।जांच एजेंसियों के अनुसार, संबंधित पीजी संचालक ने पहले खुद प्रश्न बैंक प्राप्त किया और बाद में उसे आगे प्रसारित किया। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तारी के डर से बाद में उसी ने शिकायत दर्ज कराई।
कई कोचिंग संस्थान भी रडार पर
सीबीआई और एसओजी अब कई कोचिंग सेंटरों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। कई छात्रों ने एनटीए को ईमेल भेजकर पेपर लीक की शिकायत की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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