जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर की वर्षों पुरानी और गंभीर ट्रैफिक समस्या को दूर करने के लिए प्रस्तावित पारडीह काली मंदिर से बालीगुमा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर एक बार फिर ब्रेक लग गया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक 4.644 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण को लेकर राज्य सरकार से अंतिम हरी झंडी नहीं मिल पाई है, जिसके कारण निर्माण कार्य का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है।
वन विभाग ने उठाए पर्यावरण और हाथियों के मूवमेंट पर सवाल
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वन विभाग ने परियोजना की फाइल को कुछ आपत्तियों के साथ वापस भेज दिया है। विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से कई संवेदनशील बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है:
- वन्यजीवों पर असर: कॉरिडोर निर्माण से स्थानीय वन क्षेत्र और पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- हाथियों का कॉरिडोर: क्या इस निर्माण से हाथियों के प्राकृतिक आवागमन के रास्ते प्रभावित होंगे?
नियम स्पष्ट: वन विभाग का कहना है कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के इन सभी पहलुओं का संतोषजनक और वैज्ञानिक आकलन होने के बाद ही भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी जाएगी।
रोज-रोज के ‘ट्रैफिक टॉर्चर’ से जूझ रहे हैं हजारों लोग
पारडीह से बालीगुमा तक का यह पैच जमशेदपुर के सबसे व्यस्त और दुर्घटना संभावित मार्गों में से एक है।
- भारी दबाव: इस मार्ग से हर दिन हजारों भारी ट्रक, कंटेनर और छोटे वाहन गुजरते हैं।
- लंबा इंतजार: आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहा है। इस एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने से शहरवासियों को इस ‘ट्रैफिक टॉर्चर’ से परमानेंट मुक्ति मिलने की उम्मीद थी, जो अब आगे खिसकती दिख रही है।
अब NHAI की संशोधित रिपोर्ट पर टिकी हैं उम्मीदें
इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का भविष्य अब पूरी तरह से एनएचएआई के पाले में है। यदि एनएचएआई पर्यावरण और वन्यजीवों से जुड़े वन विभाग के सभी सवालों का सटीक और संतोषजनक जवाब दे देता है, तो फाइल को दोबारा कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद ही शहर की इस लाइफलाइन का निर्माण शुरू हो सकेगा।
