झारखंड की राजधानी रांची के टाटीसिलवे इलाके में रविवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जिससे शहर के एक बड़े हिस्से में हाहाकार मच गया। दोपहर के समय गेल इंडिया की मुख्य गैस पाइपलाइन अचानक क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके चलते टाटीसिलवे, खेलगांव, बरियातू, बूटी मोड़, मोरहाबादी और लालपुर समेत कई प्रमुख इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इस तकनीकी खराबी का सीधा असर 20 हजार से अधिक परिवारों पर पड़ा। रविवार का दिन होने के कारण अचानक हुई इस घेराबंदी से हजारों घरों में दोपहर और रात का चूल्हा नहीं जल सका, जिसके बाद परेशान लोगों को भोजन के लिए होटलों, रेस्टोरेंट्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी का सहारा लेना पड़ा। राहत की बात यह रही कि इस पूरे हादसे में किसी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
गैस आपूर्ति बंद होने के बाद उपभोक्ताओं में कंपनी के प्रति भारी नाराजगी देखी गई। प्रभावित लोगों ने आरोप लगाया कि संकट के समय जब उन्होंने गेल इंडिया के टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क किया, तो उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी या संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हालांकि, घटना की सूचना मिलते ही गेल इंडिया की तकनीकी टीम तत्काल मौके पर पहुंची और युद्धस्तर पर मरम्मत का कार्य शुरू किया गया। टीम की कड़ी मशक्कत के बाद देर रात तक पाइपलाइन को दुरुस्त कर आपूर्ति दोबारा बहाल कर दी गई।
इस हादसे ने शहर के बुनियादी ढांचे और सरकारी विभागों के बीच समन्वय पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मुख्य पाइपलाइन बोकारो से रिंग रोड होते हुए रांची तक गैस पहुंचाती है, लेकिन सड़कों के नीचे पानी, बिजली, केबल और गैस की पाइपलाइनें एक साथ बिछी होने के कारण अक्सर खुदाई के दौरान ऐसे हादसे होते हैं। विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल न होने से न केवल आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ी, बल्कि इस बार बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की बर्बादी भी हुई। रांची के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी गंभीर घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
