काले कोट में इंसानियत: हर रविवार दलमा पहुंचकर सैकड़ों बंदरों का पेट भरते हैं अधिवक्ता संजय सरोज

काले कोट में इंसानियत: हर रविवार दलमा पहुंचकर सैकड़ों बंदरों का पेट भरते हैं अधिवक्ता संजय सरोज

Johar News Times
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सरायकेला/जमशेदपुर: अदालत में कानूनी बहस और मुकदमों की पैरवी करने वाले जमशेदपुर के अधिवक्ता संजय कुमार सरोज इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं। लोग उन्हें अब “मंकी मैन ऑफ जमशेदपुर” और “बंदर वाले वकील” के नाम से पहचानने लगे हैं। इसकी वजह है उनका वह अनोखा अभियान, जिसके तहत वे हर रविवार दलमा की पहाड़ियों में पहुंचकर बंदरों और अन्य वन्य जीवों के लिए भोजन लेकर जाते हैं।

जानकारी के अनुसार, संजय कुमार सरोज को बचपन से ही पशु-पक्षियों और प्रकृति से विशेष लगाव रहा है। कुछ वर्ष पहले जब वे घूमने के लिए दलमा क्षेत्र जाया करते थे, तब उन्होंने देखा कि जंगल के किनारे रहने वाले कई बंदर भोजन की तलाश में भटकते रहते हैं। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर उन्हें फल और खाद्य सामग्री देना शुरू किया।

संजय बताते हैं कि वर्ष 2019 से उन्होंने इसे नियमित रूप दिया। अब लगभग हर रविवार वे अपनी गाड़ी में केले, चना और अन्य मौसमी फल लेकर दलमा क्षेत्र पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनकी गाड़ी आते ही बंदरों के झुंड आसपास जमा हो जाते हैं, मानो उन्हें उनके आने का इंतजार रहता हो।

दलमा वन्यजीव अभयारण्य झारखंड के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में शामिल है, जहां बंदरों समेत कई वन्य प्रजातियां पाई जाती हैं।

संजय का कहना है कि जंगलों के सिकुड़ने और मानव हस्तक्षेप बढ़ने से वन्य जीवों के सामने भोजन और आवास की समस्या बढ़ी है। ऐसे में समाज के लोगों को भी इनके प्रति संवेदनशील होना चाहिए। वे हर महीने अपनी आय से हजारों रुपये खर्च कर इस सेवा कार्य को जारी रखे हुए हैं।

स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारियों ने भी उनके प्रयासों की सराहना की है। लोगों का मानना है कि उनका यह कदम सिर्फ जानवरों को भोजन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने का संदेश भी देता है। आज संजय सरोज कोल्हान क्षेत्र में पशु प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुके हैं।

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