पश्चिम एशिया से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने कूटनीतिक तनाव को खत्म करने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक समझौता हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावा किया है कि दोनों देश विवादों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर आज ही हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि यह समझौता अमलीजामा पहनता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाने वाला होर्मुज़ जलडमरूमध्य सभी देशों के व्यापार के लिए पूरी तरह सुरक्षित और खुला रहेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दावा: परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संभावित समझौते को लेकर बेहद सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा:
- यह प्रस्तावित समझौता अमेरिका और ईरान के कड़वे रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक क्रांतिकारी और मील का पत्थर साबित होगा।
- ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अब परमाणु हथियार विकसित करने की होड़ से पीछे हट गया है और दोनों पक्ष शांतिपूर्ण समाधान के लिए राजी हैं।
ईरान का फूंक-फूंक कर कदम, समझौते पर नहीं की पुष्टि
एक तरफ जहां वॉशिंगटन से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं तेहरान ने अभी तक इस समझौते पर अपनी आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।
- ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने स्पष्ट किया है कि यदि आज दोनों देशों के बीच कोई सहमति बनती भी है, तो उसे ‘अंतिम समझौता’ नहीं माना जाना चाहिए।
- ईरान के अनुसार, यह केवल आगे की कूटनीतिक बातचीत को बढ़ाने के लिए एक प्रारंभिक ढांचा मात्र होगा।
ईरान की सड़कों पर उतरे लोग, रियायतें देने का आरोप
समझौते की खबरों के बीच ईरान के कई बड़े शहरों में आंतरिक अशांति और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
- ईरानी प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए ईरान सरकार बातचीत की मेज पर जरूरत से ज्यादा रियायतें दे रही है।
- प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि देश के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के साथ किसी भी कीमत पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वैश्विक बाजार और क्रूड ऑयल पर पड़ेगा सीधा असर
अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार, अमेरिका और ईरान की इस वार्ता पर पूरी दुनिया की सांसें टिकी हैं। यदि यह शांति वार्ता सफल रहती है, तो:
- पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव के बादल छंटेंगे।
- वैश्विक ऊर्जा बाजार को भारी राहत मिलेगी और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षा की गारंटी मिलेगी।
