झारखंड की राजधानी रांची में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को लेकर स्वास्थ्य विभाग एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। 15 जून को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर जिले के 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोर-किशोरियों को पेट के कीड़ों से मुक्ति दिलाने के लिए कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी।
4.84 लाख से अधिक बच्चों को कवर करने का महालक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग ने इस विशेष अभियान के तहत रांची जिले में 4,84,435 बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को दवा देने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। दवा वितरण के सफल संचालन के लिए पुख्ता तैयारियां की गई हैं:
- दवा वितरण का कार्य प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और शिक्षकों की सीधी निगरानी में होगा।
- जो बच्चे किसी कारणवश 15 जून को दवा लेने से वंचित रह जाएंगे, उन्हें 18 जून को आयोजित मॉप-अप दिवस पर यह दवा निश्चित रूप से दी जाएगी।
क्यों जरूरी है डीवॉर्मिंग? सिविल सर्जन ने दी अहम जानकारी
रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि कृमि संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इससे बच्चों में कुपोषण, खून की कमी , अत्यधिक कमजोरी तथा शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। एल्बेंडाजोल दवा इससे बचाव में पूरी तरह प्रभावी है और बच्चों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
“सभी लाभार्थियों को स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में पर्याप्त पानी के साथ यह दवा चबाकर खिलाई जाएगी। हालांकि, जो बच्चे गंभीर रूप से बीमार हैं या जो किशोरियां गर्भवती हैं, उन्हें यह दवा नहीं दी जाएगी।” – डॉ. प्रभात कुमार, सिविल सर्जन (रांची)
‘स्वस्थ बचपन, कृमि मुक्त भविष्य’
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को निर्धारित केंद्रों पर भेजकर यह दवा जरूर दिलवाएं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर छह महीने पर डीवॉर्मिंग (कृमिनाशक दवा) देने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। विभाग ने ‘स्वस्थ बचपन, कृमि मुक्त भविष्य’ के संदेश के साथ इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए आम जनता से पूर्ण सहयोग की मांग की है।
