चक्रधरपुर: अनुमंडल अस्पताल में NHM कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 6 महीने से वेतन नहीं मिलने पर फूटा गुस्सा; पूर्व CM मधु कोड़ा ने दिया समर्थन

चक्रधरपुर अस्पताल में तालाबंदी जैसी स्थिति: 6 महीने से खाली पेट काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मी।

Johar News Times
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झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है। चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मियों और सहियाओं ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। मंगलवार से शुरू हुए इस आंदोलन के कारण अस्पताल की कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।

6 महीने से मानदेय नहीं, भुखमरी की कगार पर परिवार

अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का आरोप है कि वे पिछले 6 महीनों से बिना वेतन के काम कर रहे हैं।

  • चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में कार्यरत करीब 103 एनएचएम संविदाकर्मी इस आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इनमें एएनएम , लैब टेक्नीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर और चिकित्सक शामिल हैं।
  • हड़ताल की वजह से अस्पताल में मरीजों का पंजीकरण, लैब जांच और अन्य आवश्यक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं भी ठप पड़ गई हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पहुंचे अस्पताल, दिया समर्थन

“नियमित रूप से अपनी सेवाएं देने वाले इन कोरोना योद्धाओं और स्वास्थ्य कर्मियों को 6 महीने से वेतन न मिलना बेहद शर्मनाक है। इनके घरों में आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।” — मधु कोड़ा (पूर्व मुख्यमंत्री)

आंदोलन की खबर मिलते ही सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के नेतृत्व में भाजपा नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अस्पताल पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा जिला अध्यक्ष गुरुचरण नायक, मालती गिलुवा और डॉ. विजय सिंह गागराई शामिल थे। मधु कोड़ा ने कर्मियों की मांगों को पूरी तरह जायज बताते हुए आश्वासन दिया कि वे इस संबंध में जल्द ही राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर त्वरित समाधान की मांग करेंगे।

आंदोलनकारियों की 3 प्रमुख मांगें:

हड़ताली कर्मियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी निम्नलिखित मांगों पर लिखित और सकारात्मक निर्णय नहीं होता, आंदोलन खत्म नहीं होगा:

  1. पिछले 6 महीने के सभी लंबित मानदेय और बकाया राशि का तत्काल भुगतान किया जाए।
  2. लंबित बोनस, 8 प्रतिशत वेतन वृद्धि और अन्य देय भत्तों को तुरंत जारी किया जाए।
  3. भविष्य में हर महीने की 5 तारीख तक नियमित रूप से मानदेय का भुगतान सुनिश्चित हो।
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