घाटशिला: पूर्वी सिंहभूम जिले के हाता से मुसाबनी जाने वाली मुख्य सड़क इन दिनों राहगीरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सामाजिक वानिकी योजना के तहत सड़क के दोनों किनारों पर कतारबद्ध लगाए गए वृक्ष आज विशाल और घने हो चुके हैं। यह हरा-भरा गलियारा न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में राहगीरों को सुकून भरी छांव भी दे रहा है।
इस खूबसूरत हरित गलियारे को देखकर लोग आज भी सामाजिक वानिकी के पूर्व रेंजर रामजी राय के कर्मठ प्रयासों को याद कर उनकी सराहना करते हैं।
वर्ष 2001 की मेहनत आज दे रही है छांव
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2001 में सामाजिक वानिकी विभाग द्वारा इस मार्ग पर व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया था।
- हाता-राजनगर प्रक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर रामजी राय की देखरेख में हाता चौक से लेकर दबांकी पुलिया तक सड़क के दोनों ओर पंक्तिबद्ध साल के पौधे लगाए गए थे।
- आज साल के ये पेड़ इतने दर्शनीय और घने हो चुके हैं कि जब भी वन विभाग या प्रशासन के वरीय पदाधिकारी इस मार्ग से गुजरते हैं, तो वे रामजी राय के विजन और मेहनत की तारीफ किए बिना नहीं रह पाते।
पर्यावरण और राहगीरों के लिए लाइफलाइन
स्थानीय ग्रामीणों और नियमित आने-जाने वाले लोगों का कहना है कि यह वृक्षारोपण आज के समय में अन्य क्षेत्रों के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार दिख रहे हैं:
- चिलचिलाती धूप और गर्मी के मौसम में मुसाफिर इन पेड़ों की घनी छांव के नीचे रुककर आराम करते हैं।
- पेड़ों की यह लंबी कतार मुख्य मार्ग पर वाहनों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को सोखने में मददगार साबित हो रही है।
- ये विशालकाय वृक्ष अब स्थानीय वन्य जीवों और दुर्लभ पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुके हैं।
संरक्षण की मांग: क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से इस अद्भुत ‘हरित धरोहर’ को सुरक्षित रखने और इन पेड़ों की नियमित देखभाल व छंटाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि यह प्राकृतिक सौंदर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कायम रहे।
