अनुदानित धान बीज न मिलने से किसान बेहाल, फर्जीवाड़े की जांच भी अटकी

Johar News Times
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गुड़ाबांदा प्रखंड के अंगारपाड़ा स्थित बनमाकड़ी लैम्पस (LAMPAS) में पिछले कई महीनों से ताला लटका हुआ है। धान खरीद में बड़े पैमाने पर हुए कथित फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद जिला आपूर्ति पदाधिकारी (DSO) जुल्फीकार अंसारी ने जांच के दौरान इस लैम्पस को सील कर दिया था। लैम्पस के सील होने के बाद से यहाँ धान की सरकारी खरीद, उठाव और वितरण से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण गतिविधियां पूरी तरह ठप पड़ी हुई हैं।

जांच टीम के पहुंचते ही फरार हुआ आरोपी संचालक, घर पर भी लटका ताला

इस बड़े फर्जीवाड़े की जांच के लिए विभागीय अधिकारियों की टीम आरोपी संचालक के केंदुआपाल स्थित आवास पर दो बार छापेमारी करने पहुंची, लेकिन दोनों ही बार अधिकारियों को निराश लौटना पड़ा। आरोपी संचालक के घर पर भी ताला बंद मिला, जिसके कारण जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। मुख्य आरोपी की अनुपस्थिति और उसके लगातार फरार रहने से विभाग की पड़ताल फिलहाल अधर में लटकी हुई है।

खरीफ सीजन में बाजार से महंगा बीज खरीदने को मजबूर किसान

इस प्रशासनिक कार्रवाई और आरोपियों की धोखाधड़ी का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में खरीफ का सीजन शुरू हो चुका है और खेतों में बुआई का समय आ गया है। लैम्पस बंद रहने के कारण किसानों को सरकारी अनुदानित (subsidy) दर पर मिलने वाला धान का उन्नत बीज नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में किसानों को खुले बाजार से ऊंचे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

स्थानीय किसान राकेश दोलाई ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा:

“महीनों से लैम्पस बंद होने के कारण हम किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सरकारी नियमों के मुताबिक, लैम्पस प्रबंधन को नोडल लैम्पस के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार धान बीज की मांग भेजनी होती है, जिसके बाद सरकार द्वारा अधिकृत कंपनियां बीज उपलब्ध कराती हैं। लेकिन यहाँ ताला बंद होने से यह पूरी व्यवस्था ही ध्वस्त हो गई है।”

बीडीओ ने संचालकों से मांगी रिपोर्ट, किसान बोले- जल्द हो समाधान

इस पूरे मामले पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) डांगुर कोड़ाह ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि इस बात की गहनता से जानकारी ली जाएगी कि क्षेत्र के लिए धान बीज की मांग समय पर भेजी गई थी या नहीं। इसके लिए उन्होंने संबंधित विभाग के संचालकों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

खेती के इस सबसे महत्वपूर्ण समय में बीज न मिलने से क्षेत्र के किसानों की चिंताएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। अब परेशान किसानों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि जांच अपनी जगह चलती रहे, लेकिन किसानों के हित को देखते हुए वैकल्पिक तौर पर जल्द से जल्द अनुदानित सरकारी बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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