खूंटपानी (पश्चिमी सिंहभूम): इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं का सही तालमेल कैसे किसी की जिंदगी बदल सकता है, इसका जीता-जागता उदाहरण बने हैं पश्चिमी सिंहभूम के किसान विजय मुंदूइया। खूंटपानी प्रखंड के कुस्तुइया गांव के रहने वाले विजय ने झारखंड सरकार की ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ का लाभ उठाकर अपनी बंजर पड़ी जमीन को कमाई का एक बेहतरीन जरिया बना दिया है। मनरेगा के तहत संचालित इस योजना के जरिए उन्होंने न सिर्फ अपनी आजीविका सुधारी, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल पेश की है।
5 साल की मेहनत और बंजर भूमि पर लहलहाया बागान
करीब पांच वर्ष पहले विजय मुंदूइया को योजना के तहत 120 आम के पौधे मिले थे। उन्होंने अपनी एक एकड़ बंजर भूमि पर कड़ी मेहनत कर इन पौधों को लगाया। समय के साथ पौधों की बेहतर देखभाल की गई, और आज वे बड़े होकर फल देने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच विजय ने इस बागवानी को ही अपनी आजीविका का मुख्य आधार बना लिया है।
आम बेचकर हर साल ₹2 लाख तक का मुनाफा
विजय मुंदूइया के मुताबिक, आम की बिक्री से उन्हें हर साल 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक की बंपर आय हो रही है। इस आमदनी ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने में सक्षम हैं और उनका जीवन स्तर भी काफी सुधरा है।
“रोजगार की कमी के कारण लोग पलायन करते हैं, लेकिन विजय मुंदूइया ने मेहनत का रास्ता चुना। बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर वे आज आत्मनिर्भर हैं और पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत हैं।”
— सिद्धार्थ होनहागा, प्रखंड प्रमुख (खूंटपानी)
अब सब्जी खेती की तैयारी, प्रशासन से मिला आश्वासन
किसान विजय मुंदूइया की इस सफलता को देखने खूंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा और प्रखंड विकास पदाधिकारी धनंजय पाठक खुद उनके गांव पहुंचे। बागवानी का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों ने विजय के प्रयासों की जमकर सराहना की। इस दौरान विजय ने बंजर भूमि पर सब्जी और अन्य फसलों की खेती के विस्तार के लिए डीप बोरिंग की मांग की। बीडीओ धनंजय पाठक ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए मनरेगा के तहत जल्द ही डीप बोरिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
