डोर स्टेप डिलीवरी निविदा में अनियमितता का आरोप, उपायुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग

Johar News Times
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पूर्वी सिंहभूम जिले में खाद्यान्न वितरण से जुड़ी डोर स्टेप डिलीवरी (DSD) निविदा (टेंडर) प्रक्रिया एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। दो प्रमुख निविदाकारों (ठेकेदारों) गौरी शंकर महतो और बुधन मुर्मू ने विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी (विशिष्ट राशन पदाधिकारी), पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर को एक लिखित आवेदन देकर पूरी निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं और धांधली बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराते हुए उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

नियमों को ताक पर रखकर न्यूनतम तय दर से भी कम पर लगाई बोली

दिए गए आवेदन में शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए जारी डोर स्टेप डिलीवरी टेंडर के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन किया था। सरकारी नियम और आरएफपी (Request for Proposal – RFP) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, खाद्यान्न परिवहन के लिए अधिकतम दर 400 रुपये प्रति मीट्रिक टन (MT) तथा न्यूनतम दर 340 रुपये प्रति मीट्रिक टन निर्धारित की गई थी।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने सरकार द्वारा तय की गई सबसे न्यूनतम और वैध दर यानी 340 रुपये प्रति एमटी के हिसाब से अपनी निविदा डाली थी। इसके बावजूद कुछ चहेते और रसूखदार निविदादाताओं द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए तय न्यूनतम सीमा (340 रुपये) से भी कम दर पर बोली प्रस्तुत की गई, जो आरएफपी के टेंडर नियमों के पूरी तरह विपरीत और अवैध है।

कई क्षेत्रों के टेंडर पर उठे सवाल, तकनीकी रूप से अयोग्य को बना दिया ‘L-1’

गौरी शंकर महतो और बुधन मुर्मू ने आरोप लगाया कि सिर्फ एक नहीं, बल्कि जिले के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के टेंडर में यह धांधली की गई है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • जमशेदपुर-1 और जमशेदपुर-2
  • गोलमुरी-सह-जुगसलाई-1 और गोलमुरी-सह-जुगसलाई-2
  • घाटशिला क्षेत्र

इसके अलावा, आवेदन में एक और बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि:

“शुरुआती तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) के दौरान विभाग द्वारा कुछ निविदादाताओं को जरूरी कागजात या मापदंड पूरे न करने के कारण अयोग्य (Disqualified) घोषित कर दिया गया था। लेकिन बाद में रहस्यमयी ढंग से बैकडोर एंट्री कराते हुए उनमें से ही एक अयोग्य ठेकेदार को सबसे कम बोली लगाने वाला यानी एल-1 (L-1) घोषित कर टेंडर देने की तैयारी कर ली गई।”

वित्तीय प्रस्ताव पर पुनर्विचार और उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग

निविदाकारों ने इस पूरी चयन प्रक्रिया पर गहरा संदेह व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि उनके द्वारा जमा किए गए वित्तीय प्रस्तावों पर दोबारा निष्पक्षता से पुनर्विचार किया जाए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदन की एक-एक प्रतिलिपि पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के उपायुक्त (DC) को भी भेजी गई है, ताकि जिले के शीर्ष अधिकारी के हस्तक्षेप से इस संभावित टेंडर घोटाले का पर्दाफाश हो सके और योग्य संवेदकों को न्याय मिल सके।

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