जमशेदपुर के मानगो थाना क्षेत्र अंतर्गत पारडीह निवासी 13 वर्षीय विश्वजीत की तबीयत कथित तौर पर एक्सपायरी (म्याद खत्म) दवा खाने के बाद अचानक बिगड़ गई। शुक्रवार रात बच्चे को तेज मिचली और बार-बार उल्टी होने की शिकायत के बाद परिजन उसे तत्काल महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) अस्पताल ले गए, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। परिजनों का आरोप है कि यह दवा उन्हें एमजीएम अस्पताल के ही दवा काउंटर से दी गई थी।
ओपीडी से मिली थी पेट के कीड़ों की दवा ‘अल्बेंडाजोल’
परिजनों के अनुसार, गुरुवार को पेट संबंधी समस्या होने पर विश्वजीत को एमजीएम अस्पताल के ओपीडी (OPD) में डॉक्टरों को दिखाया गया था। डॉक्टर ने जांच के बाद दो दवाएं लिखी थीं, जिनमें पेट के कीड़ों को मारने वाली दवा अल्बेंडाजोल (Albendazole) भी शामिल थी। बच्चे के पिता टिंकू अस्पताल के ही दवा काउंटर से पर्ची दिखाकर दवाएं लेकर घर आए थे।
दवा खिलाते ही शुरू हुई उल्टियां, पैकेट देखा तो उड़े होश
बच्चे की मां ज्योत्सना देवी ने बताया कि डॉक्टर के निर्देशानुसार यह दवा शुक्रवार की रात में दी जानी थी। दवा खिलाने के कुछ ही देर बाद विश्वजीत को घबराहट होने लगी और उसने दो बार उल्टी कर दी। बच्चे की हालत बिगड़ती देख जब परिजनों ने दवा के स्ट्रिप (पैकेट) की बारीकी से जांच की, तो उनके होश उड़ गए। परिजनों का दावा है कि दवा के पैकेट पर मार्च 2026 की एक्सपायरी तिथि अंकित थी, यानी दवा की म्याद पहले ही खत्म हो चुकी थी। इसके बाद देर रात पड़ोसियों की मदद से बच्चे को दोबारा एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पिता का सवाल: “अगर दवा की म्याद खत्म हो चुकी थी, तो वह सरकारी अस्पताल के दवा काउंटर तक कैसे पहुंची और मरीजों के बीच इसे क्यों बांटा जा रहा था? इस लापरवाही के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
अस्पताल प्रबंधन का इनकार: स्टॉक पहले ही खत्म हो चुका था
दूसरी ओर, एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने अस्पताल की ओर से एक्सपायरी दवा दिए जाने के परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अस्पताल में इस संबंधित दवा का स्टॉक काफी पहले ही पूरी तरह समाप्त हो चुका था। प्रारंभिक आंतरिक जांच के अनुसार, यह दवा अस्पताल के काउंटर से जारी नहीं की गई है।
अधीक्षक ने आगे कहा कि सामान्य परिस्थितियों में एक्सपायरी दवा का असर कम हो जाता है, जिससे बीमारी ठीक नहीं होती, हालांकि बच्चे की अचानक बिगड़ी स्थिति और पूरे मामले की विभागीय जांच की जा रही है। फिलहाल परिजनों और अस्पताल प्रशासन के दावों में सीधा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह प्रतिबंधित दवा कहाँ से आई और बच्चे की तबीयत बिगड़ने का मुख्य कारण क्या था।
