नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) अगले साल से परीक्षा परिणाम प्रक्रिया में बड़ा बदलाव कर सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छात्रों को डिजिलॉकर में मार्कशीट, माइग्रेशन और पासिंग सर्टिफिकेट के साथ उनकी जांची हुई आंसरशीट की स्कैन कॉपी भी उपलब्ध कराई जा सकती है। यह कदम मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और विवाद कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। यह पहल ऑनस्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवादों के बाद विचाराधीन है। वर्तमान में छात्रों को आंसरशीट देखने के लिए अलग से आवेदन और शुल्क देना पड़ता है, जबकि नई व्यवस्था लागू होने पर आंसरशीट सीधे डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध हो सकेगी।
OSM की खामियों की होगी समीक्षा
केंद्र सरकार ने माना है कि ओएसएम प्रणाली में कुछ तकनीकी कमियां हैं। इन्हें दूर करने के लिए आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है, जो पूरी प्रक्रिया और पोर्टल की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देगी।
2027 से हो सकता है लागू
हालांकि सीबीएसई ने अभी कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है और इसकी शुरुआत 2027 की बोर्ड परीक्षाओं से हो सकती है।
हर साल करोड़ों पन्नों की स्कैनिंग
सूत्रों के मुताबिक इस वर्ष 17 लाख छात्रों की करीब 90 लाख उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गई थीं। एक उत्तर पुस्तिका में औसतन 40 पृष्ठ होते हैं। शिकायतों के बाद 68 हजार उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा स्कैन किया गया, जबकि 13 हजार मामलों में मैन्युअल जांच करनी पड़ी। कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के मिश्रित होने की शिकायतें भी सामने आईं, जिनका पुनर्मूल्यांकन कराया गया।
एक जून से शुरू होगा पोर्टल
सीबीएसई ने परिणाम के बाद सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए नया पोर्टल एक जून से शुरू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड का कहना है कि इससे छात्रों को आवेदन के दौरान तकनीकी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
खराब रिजल्ट पर शिक्षकों से मांगा जवाब
इस बीच दिल्ली सरकार के कुछ स्कूलों में कक्षा 12वीं का परिणाम अपेक्षित नहीं रहने पर संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। शिक्षकों को अतिरिक्त कक्षाएं संचालित करने और कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देने की सलाह भी दी गई है। हालांकि, गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि परिणामों में गिरावट का मुख्य कारण ओएसएम प्रणाली की तकनीकी खामियां हैं, न कि शिक्षकों की कार्यशैली। संघ ने शिक्षा मंत्री से सभी नोटिस वापस लेने की मांग की है।
