संयुक्त राष्ट्र में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को लेकर हुई तीसरे दौर की समीक्षा वार्ता बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई। इसके बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर वार्ता में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया है। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो NPT का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 27 अप्रैल से शुरू हुई समीक्षा बैठक शुक्रवार को अपने अंतिम दिन भी किसी सहमति तक नहीं पहुंच सकी। रिपोर्टों के अनुसार अंतिम दस्तावेज का मसौदा चार बार बदला गया, लेकिन सदस्य देशों के बीच विवाद खत्म नहीं हो सका। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि अमेरिका की “अत्यधिक मांगों” ने NPT को “फ्री फॉल” की स्थिति में पहुंचा दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी दबाव के कारण लगातार तीसरी बार समीक्षा सम्मेलन अंतिम संयुक्त दस्तावेज स्वीकार करने में विफल रहा।
सबसे बड़ा विवाद उस प्रस्तावित लाइन को लेकर हुआ जिसमें कहा गया था कि “ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता, न विकसित कर सकता है और न ही उसकी तलाश कर सकता है।” ईरान ने इस लाइन को हटाने की मांग की, जबकि अमेरिका इसे दस्तावेज में बनाए रखने पर अड़ा रहा। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच लंबी बातचीत भी हुई, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इसके अलावा यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण से जुड़े कुछ विवादित शब्द भी मसौदे से हटाए गए थे, ताकि सहमति बन सके। इसके बावजूद सदस्य देश अंतिम दस्तावेज पर एकमत नहीं हो पाए। सम्मेलन अध्यक्ष डो हंग वियेत ने इसे “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताया।
गौरतलब है कि NPT समीक्षा सम्मेलन हर पांच साल में आयोजित किया जाता है, लेकिन यह लगातार तीसरी बार है जब सम्मेलन किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका। वर्तमान में 191 देश इस संधि का हिस्सा हैं, जिनमें पांच मान्यता प्राप्त परमाणु हथियार संपन्न देश भी शामिल हैं।
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