गुमला : झारखंड के गुमला जिले में भारतमाला सड़क परियोजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शिवालया कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। गुमला के लट्ठा बरटोली में टाना भगतों की जमीन पर सड़क निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब रायडीह प्रखंड से नया मामला सामने आया है। यहां ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भारतमाला सड़क परियोजना का निर्माण प्राचीन सरना स्थल से होकर किया जा रहा है। इसके विरोध में ग्रामीण एकजुट हो गए हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे किसी भी कीमत पर सरना स्थल से सड़क नहीं बनने देंगे। इसके साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा दिया गया मुआवजा लौटाने का भी निर्णय लिया है।
सरना स्थल बचाने को लेकर हुई बैठक
रायडीह प्रखंड के कटकायां गांव में गुरुवार को ग्राम प्रधान हीरालाल एक्का की अध्यक्षता में विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और कांग्रेस नेता ज्योति कुजूर मुख्य रूप से मौजूद थीं। बैठक का उद्देश्य भारतमाला सड़क परियोजना से गांव के प्राचीन सरना-मसना स्थल की रक्षा करना और ग्रामीणों को एकजुट करना था। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना का मार्ग वर्षों पुराने सरना स्थल के बीच से गुजर रहा है। उनका कहना है कि निर्माण एजेंसी जबरन इस स्थल को हटाने का प्रयास कर रही है, जिससे आदिवासी समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
सर्वे रिपोर्ट को बताया गलत
बैठक में पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने गुमला उपायुक्त की उस सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि निर्माण क्षेत्र में कोई धार्मिक स्थल नहीं पड़ता है। उन्होंने रिपोर्ट को भ्रामक और गलत बताते हुए कहा कि सरना स्थल सड़क के ठीक बीच में स्थित है। गीताश्री उरांव ने कहा कि सरना स्थल को हटाने की कोशिश आदिवासी संस्कृति और आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है।

आंदोलन की चेतावनी
बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में सड़क निर्माण का विरोध करते हुए कहा कि वे अपनी जमीन के बदले मिला मुआवजा भू-अर्जन विभाग को लौटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरना स्थल से छेड़छाड़ नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। बैठक में ज्योति कुजूर, फौदा उरांव, कैप्टन लोहरा उरांव, लोथे उरांव, बिंझु उरांव, टीपरु मुंडा सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।
