घाटशिला के तीन प्रखंडों के 103 झारखंड आंदोलनकारियों को मिला प्रशस्ति पत्र, एसडीओ ने संघर्ष को बताया ऐतिहासिक

घाटशिला के तीन प्रखंडों के 103 झारखंड आंदोलनकारियों को मिला प्रशस्ति पत्र, एसडीओ ने संघर्ष को बताया ऐतिहासिक

Johar News Times
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घाटशिला : अलग झारखंड राज्य के निर्माण में आंदोलनकारियों के योगदान को स्मरणीय बताते हुए घाटशिला में जेसी हाई स्कूल स्थित आशा ऑडिटोरियम में झारखंड आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों के सम्मान में प्रशस्ति पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर घाटशिला, धालभूमगढ़ और मुसाबनी प्रखंड के कुल 103 आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में घाटशिला के 21, धालभूमगढ़ के 70 और मुसाबनी के 12 आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। समारोह का उद्घाटन एसडीओ सुनील चन्द्र, घाटशिला सीओ निशांत अंबर, धालभूमगढ़ सीओ मनोहर लिंडा तथा आंदोलनकारी नेता शंकर चंद्र हेंब्रम, हरि शंकर महतो आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। एसडीओ सुनील चन्द्र ने कहा कि झारखंड आंदोलन केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह अस्तित्व, पहचान और अधिकार की लड़ाई थी। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने अपने भविष्य, पढ़ाई और परिवार की चिंता छोड़कर राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया, जिसका योगदान हमेशा ऐतिहासिक रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों को लेकर संवेदनशील है और ऐसे कार्यक्रम उनकी पीढ़ी तक संघर्ष की कहानी पहुंचाने का माध्यम हैं।

इस अवसर पर आंदोलनकारी हरि शंकर महतो ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को सम्मानित किया जाना गर्व की बात है और उम्मीद जताई कि सभी वास्तविक आंदोलनकारियों को जल्द सम्मान मिलेगा। वहीं शंकर चंद्र हेंब्रम ने कहा कि हजारों लोगों ने आंदोलन में भाग लिया, जेल गए और पुलिस प्रताड़ना झेली, इसलिए सभी वास्तविक आंदोलनकारियों की पहचान कर उन्हें उचित सम्मान और सम्मान राशि दी जानी चाहिए।

कार्यक्रम में विधायक सोमेश चंद्र सोरेन को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था, लेकिन आवश्यक कार्य के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके।

इसी बीच रामदास हांसदा एवं कंचन कर ने कुछ लोगों को फर्जी रूप से प्रमाण पत्र दिए जाने का आरोप लगाते हुए अनुमंडल पदाधिकारी को उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं आंदोलन में सक्रिय रहे हैं और वास्तविक आंदोलनकारियों की सही पहचान आवश्यक है। समारोह में बड़ी संख्या में आंदोलनकारी, उनके आश्रित एवं विभिन्न प्रखंडों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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