आदित्यपुर नगर निगम के अधिकृत संवेदकों ने शनिवार को टेंडर प्रक्रिया में बड़े बदलाव और सुधार की मांग को लेकर नगर निगम कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान संवेदक संघ ने डिप्टी मेयर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें 10 लाख रुपये तक की योजनाओं के टेंडर ऑफलाइन कराने तथा स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने की प्रमुख मांग की गई है।
ऑनलाइन टेंडर से स्थानीय ठेकेदार हो रहे बेरोजगार
प्रदर्शन कर रहे संवेदकों ने वर्तमान ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। संवेदक संघ के अध्यक्ष ने कहा:
वर्तमान ऑनलाइन व्यवस्था के कारण स्थानीय ठेकेदारों को काम का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है। बाहरी और बड़ी कंपनियां छोटी-छोटी योजनाओं के टेंडर भी हथिया लेती हैं, जिससे स्थानीय संवेदक पूरी तरह बेरोजगार हो रहे हैं। हमारी मांग है कि कम से कम 10 लाख रुपये तक के कार्य स्थानीय स्तर पर ही ऑफलाइन कराए जाएं।”
अधिकारियों पर उठे सवाल और कमीशनखोरी के आरोप
प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर भी तीखे सवाल खड़े किए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग की। संवेदकों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है।
इसके अलावा, संवेदकों ने अग्रधन राशि (सिक्योरिटी मनी) की वापसी में बड़े पैमाने पर कथित कमीशनखोरी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि काम पूरा होने के बाद भी सिक्योरिटी मनी वापस लेने के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं और बिना ‘चढ़ावे’ (रिश्वत) के फाइल आगे नहीं बढ़ती।
मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
संवेदकों ने नगर निगम प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। संवेदक आने वाले दिनों में काम पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
नगर निगम का पक्ष: आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी तरफ, नगर निगम प्रशासन ने कमीशनखोरी और पारदर्शिता की कमी जैसे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और सरकारी नियमों के तहत ही काम हो रहा है। वहीं, ज्ञापन लेने के बाद डिप्टी मेयर ने आश्वासन दिया कि संवेदकों की मांगों से संबंधित विभाग को अवगत करा दिया जाएगा और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
