रांची: झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अब और मजबूत होगी। राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों, सदर अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम स्थापित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर 11.62 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
नई व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के निदेशक, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल से सीधे ऑनलाइन जुड़ सकेंगे। वे अस्पतालों की स्थिति की समीक्षा कर सकेंगे, आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और मौके पर ही दिशा-निर्देश दे सकेंगे। अब तक विभागीय समीक्षा बैठकों में केवल सिविल सर्जन या अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ही शामिल हो पाते थे, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज तक के चिकित्सा प्रभारी भी सीधे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ सकेंगे।
विभाग को यदि किसी अस्पताल में लापरवाही, अव्यवस्था या मरीजों के इलाज में गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो अधिकारी संबंधित अस्पताल के प्रभारी से सीधे संपर्क कर स्थिति की जानकारी ले सकेंगे और तत्काल निर्देश जारी कर सकेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उपकरणों की खरीद GeM पोर्टल या ई-टेंडर के माध्यम से की जाएगी। प्रत्येक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम पर 4.58 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित सिविल सर्जन, अधीक्षक और चिकित्सा प्रभारी की होगी। जिन अस्पतालों में पहले से ऐसी सुविधा उपलब्ध है, वहां दोबारा स्थापना नहीं की जाएगी। योजना के तहत राज्य के 5 मेडिकल कॉलेज, 24 सदर अस्पताल, 10 अनुमंडल अस्पताल और 191 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, यानी कुल 230 स्वास्थ्य संस्थानों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा स्थापित की जाएगी।
