झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। बीते कुछ महीनों में हाथियों के हमलों में कई लोगों की मौत और दर्जनों ग्रामीणों के घायल होने की घटनाओं ने सरकार और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। खासकर कोल्हान, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण इलाकों में लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
हाल के महीनों में पश्चिमी सिंहभूम और आसपास के जंगल क्षेत्रों में एक दतैल हाथी के हमले में 20 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं। कई घटनाओं में हाथियों ने घरों को नुकसान पहुंचाया, फसलें रौंदी और रात के समय गांवों में घुसकर हमला किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों की कटाई, खनन परियोजनाएं, हाथी कॉरिडोर पर बढ़ता अतिक्रमण और भोजन-पानी की कमी इस संघर्ष की मुख्य वजह बन रहे हैं। दलमा वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण हाथी आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा और राहत योजनाओं की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन विभाग को हाथी कॉरिडोर चिह्नित करने, रेस्क्यू टीम बनाने और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग अब सोलर फेंसिंग, ड्रोन निगरानी, रेडियो कॉलर और अर्ली वार्निंग सिस्टम जैसे उपायों पर काम कर रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है ताकि इंसानों और वन्यजीवों के बीच यह संघर्ष कम हो सके।
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