गिरिडीह: भवन और अन्य निर्माण कार्य कराने के बावजूद लेबर सेस जमा नहीं करने वालों के खिलाफ श्रम विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को न केवल पेनाल्टी के साथ राशि जमा करनी होगी, बल्कि कानूनी कार्रवाई और सर्टिफिकेट केस का भी सामना करना पड़ सकता है।
श्रम विभाग मजदूरों के कल्याण के लिए लेबर सेस की वसूली को लेकर अभियान चला रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जून के पहले सप्ताह तक गिरिडीह जिले से 12 लाख 45 हजार 404 रुपये लेबर सेस के रूप में सरकारी खाते में जमा कराए गए हैं। वहीं, पिछले वित्तीय वर्ष में जिले से 6 करोड़ 62 लाख 7 हजार 728 रुपये की वसूली हुई थी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में बड़े पैमाने पर भवन और अन्य निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन कई लोग लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लेबर सेस जमा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसे सरकार के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
गिरिडीह प्रखंड के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि सभी निर्माण कार्य कराने वालों को निर्धारित लेबर सेस जमा करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य की कुल लागत का एक प्रतिशत लेबर सेस के रूप में लिया जाता है, जिसका उपयोग मजदूरों के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है।
उन्होंने बताया कि राशि जमा नहीं करने वालों को विभाग की ओर से पहले तीन नोटिस भेजे जाते हैं। इसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर सर्टिफिकेट केस दर्ज किया जाता है। ऐसे मामलों में बकाया राशि के साथ दो प्रतिशत अतिरिक्त जुर्माना भी वसूला जाता है। श्रम विभाग ने निर्माण कार्य कराने वाले सभी लोगों से समय पर लेबर सेस जमा करने की अपील की है, ताकि कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके और मजदूर कल्याण योजनाओं को भी मजबूती मिल सके।
“सभी तरह के भवन निर्माण में लेबर सेस जमा करना अनिवार्य है। लोग इसे जरूरी समझ कर जमा करें। लेबर सेस जमा नहीं करने वालों को नोटिस भेजी जा रही है।”
