दुमका अवैध खनन: तत्कालीन CO अमृता कुमारी पर गिरी गाज, लापरवाही के आरोप में रोकी गई दो वेतनवृद्धि

"जब्त 58 ट्रकों में से 42 हो गए थे फरार: दुमका अवैध खनन मामले में तत्कालीन महिला CO नापीं, सीएम की मुहर के बाद कार्मिक विभाग का बड़ा एक्शन।

Johar News Times
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झारखंड में अवैध खनन के खिलाफ जारी प्रशासनिक सख्ती के बीच एक बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है। दुमका जिले के शिकारीपाड़ा में पदस्थापन के दौरान अवैध खनन रोकने में लापरवाही और शिथिलता बरतने के आरोप में तत्कालीन अंचल अधिकारी अमृता कुमारी पर बड़ा एक्शन लिया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हरी झंडी मिलने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने उनकी दो वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का दंडात्मक आदेश जारी कर दिया है।

क्या है पूरा मामला? (2020 का विवाद)

यह पूरा मामला साल 2020 का है, जब दुमका के तत्कालीन उपायुक्त ने अंचल अधिकारी अमृता कुमारी के खिलाफ गंभीर आरोपों की फेहरिस्त तैयार कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजी थी। आरोपों के मुताबिक:

  • अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए 58 ट्रकों में से 42 ट्रक अधिकारियों की लापरवाही के कारण मौके से निकल भागने में सफल रहे।
  • अवैध बालू और पत्थर खनन को लेकर नियमित रूप से विभाग को रिपोर्ट नहीं भेजी गई।
  • कतिपय मामलों में जांच प्रतिवेदन समय पर उपलब्ध न कराकर फाइलों में बैकडेटिंग करने जैसे गंभीर आरोप भी जांच में सही पाए गए।

मजदूर की मौत के मामले में भी घिरीं

आरोप पत्र में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि क्षेत्र में चल रहे अवैध पत्थर खनन के दौरान एक मजदूर की संदिग्ध मौत हो गई थी। इस संवेदनशील मामले में भी तत्कालीन सीओ द्वारा उच्चाधिकारियों के समक्ष कोई आवश्यक स्पष्टीकरण या संतोषजनक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई थी, जिसे सेवा नियमावली का घोर उल्लंघन माना गया।

सरकार ने खारिज किया स्पष्टीकरण

विभागीय कार्रवाई के दौरान अधिकारी अमृता कुमारी ने अपने बचाव में तर्क दिया था कि तत्कालीन उपायुक्त ने बाद में उन्हें आरोपमुक्त करने की अनुशंसा की थी। हालांकि, राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समीक्षा में यह दलील टिक नहीं सकी।

सरकार ने पाया कि अवैध खनन जैसी गंभीर समस्या पर निगरानी और रोकथाम के स्तर पर अपेक्षित सतर्कता नहीं बरती गई। इसके बाद सरकार ने उनके जवाब को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए ‘झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016’ के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की।

इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और इसे राज्य में अवैध खनन पर शून्य सहिष्णुता के तहत अधिकारियों की जवाबदेही तय करने वाले एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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