चाईबासा: 58 करोड़ की जल-नल योजना में ‘अंधेरगर्दी’, 99% बजट साफ फिर भी प्यासे हैं ग्रामीण; PHED दफ्तर पर फूटा गुस्सा

"करोड़ों की योजना, कागजों पर पानी: चाईबासा में ₹58 करोड़ खर्च होने के बाद भी बूंद-बूंद को तरस रहे लोग।"

Johar News Times
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झारखंड में जल जीवन मिशन के दावों की पोल खोलती एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड की बिला पंचायत में 58.25 करोड़ रुपये की वृहद जलापूर्ति योजना में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के चक्रधरपुर कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और कार्यपालक अभियंता को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर खाली डेगची (बर्तन) लेकर पहुंची थीं।

खेल समझिए: 58.25 करोड़ का बजट, 57.92 करोड़ खर्च… पर पानी ‘गायब’

ग्रामीणों ने विभागीय आंकड़ों का हवाला देते हुए सीधे भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में स्वीकृत 58.25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में से लगभग 57.92 करोड़ रुपये (करीब 99%) खर्च दिखाए जा चुके हैं। इसके बावजूद धरातल पर हकीकत यह है कि आठ साल बीत जाने के बाद भी पंचायत के किसी भी गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। लगभग पूरी राशि ठिकाने लगाने के बाद भी जनता प्यासी है, जो सरकारी धन के खुले दुरुपयोग को दर्शाता है।

अधूरी पाइपलाइन, बदहाल सड़कें और बंद पड़ी जलमीनारें

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि योजना के तहत कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने का काम बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है। जहां ठेकेदार ने पाइप डाले भी हैं, वहां सड़कों और जमीन की मरम्मत तक नहीं की गई, जिससे ग्रामीणों का चलना दूभर हो गया है। कई जगहों पर जलमीनार और पंप हाउस की संरचनाएं खंडहर की तरह अधूरी खड़ी हैं। नतीजा यह है कि आज भी हजारों ग्रामीण कुएं, चापाकल और नदी-चुआं जैसे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर हैं।

ग्रामीणों ने सौंपी 10 सूत्री मांगें, ऑडिट की मांग

ग्रामीणों ने रैली निकालकर जल-नल योजना में हुए कथित घोटाले के खिलाफ पोस्टर भी प्रदर्शित किए। पीएचईडी के अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • योजना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच हो।
  • 57.92 करोड़ रुपये की निकासी के बावजूद काम अधूरा छोड़ने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों और संवेदकों पर कानूनी एफआईआर दर्ज हो।
  • योजना के वित्तीय और तकनीकी अभिलेखों का पब्लिक ऑडिट कराया जाए और खर्च का विवरण पंचायत भवन में चस्पा किया जाए।
  • जलमीनार निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई ग्रामीणों की भूमि का उचित मुआवजा तुरंत दिया जाए।

मांग पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ लहजे में प्रशासन और विभाग को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द से जल्द संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे चरणबद्ध तरीके से बड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

इस विशाल प्रदर्शन और घेराव में मुख्य रूप से रामलाल लागुरी, वीरेंद्र बोयपाई, आनंद लागुरी, सेलाई लागुरी, बलराम सिंह, अर्जुन सिंह लागुरी, गंगाराम लागुरी, बुधराम बोयपाई, सुखदेव बोयपाई, मानसिंह हेंब्रम, कृष्णा पूर्ति, सोमनाथ कालुंडिया, बबलू कालुंडिया, वीर सिंह गागराई, विक्रम नाग, मोहन सिंह मारला और तरकांत हेंब्रम समेत बिला पंचायत के सैकड़ों महिला-पुरुष ग्रामीण उपस्थित रहे।

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