‘क्या बिहार दिवालिया होने की कगार पर है?’ पेंशन के लिए इमरजेंसी फंड से ₹3662 करोड़ निकालने पर तेजस्वी का सरकार पर बड़ा हमला

"बजट खाली या वित्तीय मिसमैनेजमेंट? पेंशन बांटने के लिए बिहार सरकार को क्यों तोड़ना पड़ा 'इमरजेंसी फंड'?"

Johar News Times
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बिहार की सियासत में वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक नया घमासान छिड़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए ‘बिहार आकस्मिक निधि’ से 3662 करोड़ रुपये निकालने के सरकार के फैसले पर तीखे सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने पूछा है कि क्या बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि राज्य दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया है?

सम्राट चौधरी ने ट्रांसफर किए पैसे, तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर घेरा

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को राज्य के लगभग एक करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए भेजी। सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि हर महीने की 10 तारीख तक यह राशि लाभार्थियों के खातों में पहुंच जानी चाहिए।

इसी बीच, तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सम्राट कैबिनेट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। तेजस्वी ने दावा किया कि मई, जून और जुलाई 2026 की सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए कैबिनेट ने बजटीय राशि के बजाय सीधे ‘बिहार आकस्मिक निधि’ से 3662 करोड़ रुपये की अग्रिम निकासी को मंजूरी दी है।

‘इमरजेंसी फंड’ का इस्तेमाल पेंशन के लिए क्यों?

तेजस्वी यादव ने सरकार की वित्तीय नीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा:

“आकस्मिक निधि का उपयोग सामान्यतः किसी अप्रत्याशित संकट, अचानक आई प्राकृतिक आपदा या वित्तीय आपात स्थिति में किया जाता है। जब पेंशन जैसी नियमित और पूर्व-निर्धारित योजना के लिए इस इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह साफ तौर पर राज्य की डगमगाती वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।”

बिहार में वित्तीय संकट गहराया, कई योजनाएं ठप: RJD

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि बिहार इस वक्त गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। अपने दावों को मजबूती देते हुए उन्होंने कई बड़ी बातें सामने रखीं:

  • राज्य में एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई विकास कार्यों के ठेकेदारों का भुगतान नहीं हुआ है।
  • वर्ष 2023-24 में स्वीकृत की गईं कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर फंड की कमी के कारण अब तक काम शुरू नहीं हो सका है।
  • छात्रवृत्ति भुगतान में लगातार देरी हो रही है और ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ भी प्रभावित है। यही नहीं, फंड की कमी का हवाला देकर ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ को भी बंद करने का निर्णय लिया गया है।

सरकार से श्वेत पत्र या स्पष्ट जवाब की मांग

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता को बताना चाहिए कि नियमित बजटीय प्रावधानों के होने के बावजूद आकस्मिक निधि से इतनी बड़ी राशि निकालने की नौबत क्यों आन पड़ी?

फिलहाल, तेजस्वी यादव के इन गंभीर आरोपों पर सरकार या जेडीयू-भाजपा गठबंधन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इस खुलासे के बाद बिहार के सियासी गलियारों में आर्थिक बदहाली और राजकोषीय घाटे को लेकर बहस बेहद तेज हो गई है।

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