जर्जर भवन के साये में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, दो कमरों में संचालित हो रहा पूरा स्कूल

जर्जर भवन के साये में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, दो कमरों में संचालित हो रहा पूरा स्कूल

Johar News Times
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गुड़ाबांदा, शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के सरकारी दावों के बीच गुड़ाबांदा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय नाइकानसोल की स्थिति बदहाल बनी हुई है। विद्यालय में कक्षा 1 से 5वीं तक कुल 34 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई महज दो कमरों के सहारे संचालित हो रही है। जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच बच्चे भविष्य संवारने को मजबूर हैं।

बारिश में और बिगड़ जाती है स्थिति
विद्यालय के दोनों कमरों की हालत काफी खराब है। खिड़कियां नहीं खुलतीं और कमरों में पर्याप्त रोशनी व वेंटिलेशन की भी व्यवस्था नहीं है। सामान्य दिनों में जगह की कमी के कारण कुछ बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही स्थिति और गंभीर हो जाती है। परिसर में जलभराव हो जाता है और कमरों के भीतर प्लास्टर गिरने लगता है। हादसे की आशंका के बीच शिक्षक सभी पांच कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाने को विवश हो जाते हैं।

पेयजल और रसोईघर की भी समस्या
विद्यालय में बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। उपलब्ध उपकरण भी उपयोग के लायक नहीं हैं। वहीं मध्याह्न भोजन एक अत्यंत जर्जर किचन शेड में तैयार किया जाता है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जंगल से सटा स्कूल, सुरक्षा की चिंता
विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है और यह जंगल से सटा हुआ है। ऐसे में जंगली जानवरों और असामाजिक तत्वों का खतरा हमेशा बना रहता है। बरामदा भी जर्जर हो चुका है, जिससे बच्चों और शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है।

मरम्मत की फाइलें दफ्तरों में अटकीं
विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने भवन की मरम्मत और अन्य समस्याओं को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को प्रस्ताव और फाइलें भेजी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उनका कहना है कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद बच्चे नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं, लेकिन जर्जर भवन में पढ़ाई कराना जोखिम भरा होता जा रहा है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने विद्यालय भवन की जल्द मरम्मत तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिल सके।

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