कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान को पुलिस द्वारा सार्वजनिक रूप से सड़कों पर घुमाए जाने का मामला चर्चा में है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
फालता में पैदल घुमाया गया आरोपी
दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में गुरुवार को पुलिस जहांगीर खान को विभिन्न इलाकों में पैदल ले जाती दिखाई दी। सामने आए वीडियो और तस्वीरों में वह पुलिस सुरक्षा के बीच सड़कों पर चलते नजर आए। जहांगीर को सोमवार को भारत-नेपाल सीमा स्थित पानीटंकी से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ जबरन वसूली समेत कई गंभीर मामलों में सात एफआईआर दर्ज हैं। अदालत ने उन्हें पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा है।
हाईकोर्ट ने जताई थी आपत्ति
5 जून को कलकत्ता हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने के मामलों पर पुलिस से रिपोर्ट तलब की थी। अदालत ने कहा था कि पुलिस को गिरफ्तारी का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित या बदनाम नहीं किया जा सकता।
अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं जहांगीर
जहांगीर खान को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। फालता क्षेत्र में उनका लंबे समय तक प्रभाव रहा है। स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य, लेबर सप्लाई और अन्य गतिविधियों में उनके दबदबे की चर्चा होती रही है। हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है।
कानूनी बहस हुई तेज
इस घटना के बाद आरोपियों के सार्वजनिक प्रदर्शन और पुलिस अधिकारों की सीमाओं को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसलों में गिरफ्तारी के दौरान व्यक्ति की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया गया है। ऐसे में जहांगीर खान को सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने की घटना कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है।
