नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध जैसी परिस्थितियों और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे पूर्वोत्तर में लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान हुआ और तेल-गैस अन्वेषण का रास्ता साफ हो गया। इस समझौते से पूर्वोत्तर क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज तथा उत्पादन को गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अस्थिर हैं और कई देश ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं, घरेलू ऊर्जा संसाधनों का विकास भारत की रणनीतिक जरूरत बन गया है।
केंद्र सरकार के अनुसार, यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूती देगा। इससे आयातित तेल पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।

साथ ही पूर्वोत्तर में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार ने इसे केवल दो राज्यों के बीच विवाद के समाधान तक सीमित नहीं बताया, बल्कि राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और देश की आर्थिक मजबूती की दिशा में एक दूरगामी एवं ऐतिहासिक पहल करार दिया है।
