पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में बड़े पैमाने पर जारी विरोध-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहे। राजनीतिक, आर्थिक और नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों के हताहत होने की खबरों के बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार रावलाकोट, बाग, कोटली, मीरपुर और मुजफ्फराबाद समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी 38 सूत्री मांगों को लेकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक मार्च की तैयारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन उनकी लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों की मांगों को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रहा है। दूसरी ओर, अधिकारियों ने कई मार्गों पर बैरिकेडिंग, आवाजाही पर रोक और आंदोलन के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
भारत के दावे को मिल रही नई चर्चा
PoJK में लगातार बढ़ते असंतोष को भारत के उस पुराने रुख से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें नई दिल्ली हमेशा कहती रही है कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के लोगों को राजनीतिक अधिकारों और विकास से वंचित रखा गया है। क्षेत्र में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर वहां की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो पाकिस्तान के लिए PoJK में स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, भारत की नजर भी क्षेत्र के घटनाक्रम पर बनी हुई है, क्योंकि यह इलाका भारत का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। बढ़ते प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और जनाक्रोश के बीच PoJK में हालात फिलहाल बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
