घर बनवा रहे या करा रहे पेंटिंग तो हो जाएं अलर्ट, आपका पेंट आग और जहरीले धुएं का कारण तो नहीं?

साल 2026: मौजूदा समय तक आते-आते यह आंकड़ा और भी भयावह हो चुका है।

Johar News Times
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घर बनवाते समय या होम रिनोवेशन के दौरान हम इंटीरियर, मजबूत दरवाजे और प्रीमियम वायरिंग पर तो लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन दीवारों पर होने वाले पेंट को अक्सर सिर्फ ‘खूबसूरती’ से जोड़कर छोड़ देते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपकी दीवारों पर चमकने वाला यही पेंट किसी हादसे के वक्त जानलेवा साबित हो सकता है?

दिल्ली से लेकर मुजफ्फरपुर तक हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांडों ने सबको झकझोर कर रख दिया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आग लगने की घटनाओं में ज्यादातर मौतें झुलसने से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं से दम घुटने के कारण होती हैं। आइए जानते हैं कि आपका साधारण पेंट कैसे आग में घी का काम करता है और इससे बचने का सुरक्षित विकल्प क्या है।

क्यों खतरनाक है आपका पारंपरिक पेंट?

आज भी भारत के अधिकांश घरों में एक्रिलिक और प्लास्टिक-इमल्शन पेंट (Plastic-Emulsion Paint) का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता है। बजट में होने और दीवार को अच्छी चमक देने के कारण लोग इसे चुनते हैं, लेकिन इसके पीछे छिपा खतरा बेहद डरावना है:

  • पेट्रोलियम-पॉलिमर बेस: इन पेंट्स में केमिकल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का बेस होता है, जो आग लगते ही बिल्कुल पेट्रोल या प्लास्टिक की तरह व्यवहार करने लगते हैं।
  • आग को भड़काना: यह पेंट आग की लपटों को दबाने के बजाय उन्हें दीवार पर तेजी से फैलने में मदद करता है।
  • जहरीला धुआं: जलने पर इस पेंट से भारी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें निकलती हैं। बंद कमरों में यह धुआं पल भर में लोगों का दम घोंट देता है, जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल पाता।

डरा रहे हैं आग के आंकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है:

  • साल 2023: देश में आग लगने की 7,000 से ज्यादा घटनाएं हुईं, जिनमें लगभग 6,900 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
  • साल 2026: मौजूदा समय तक आते-आते यह आंकड़ा और भी भयावह हो चुका है।

बंद इमारतों या रिहायशी घरों में होने वाले हादसों में दीवारों के पारंपरिक पेंट और प्लास्टिक के जलने से निकलने वाला धुआं ही सबसे बड़ा ‘साइलेंट किया’ बनता है।

समाधान: ‘सिलिकेट मिनरल पेंट’ तकनीक

इस जानलेवा समस्या से निपटने के लिए अब मार्केट में फायर-रेसिस्टेंट (आग प्रतिरोधी) तकनीक वाले पेंट्स मौजूद हैं। इनमें सबसे बेहतरीन और सुरक्षित उपाय बनकर उभरा है — सिलिकेट मिनरल पेंट (Silicate Mineral Paint)। यह पेंट पूरी तरह से प्राकृतिक और अकार्बनिक होते हैं। इन्हें पोटैशियम सिलिकेट और खनिजों से बनाया जाता है। इनमें पेट्रोलियम बेस नहीं होता, इसलिए ये आग नहीं पकड़ते हैं। अगर कमरे में भीषण आग लग भी जाए तो यह पेंट जलेगा नहीं, सिर्फ थोड़ा झुलस जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि ये पेंट किसी तरह का जहरीला धुआं नहीं छोड़ते हैं।

दीवार का स्थायी हिस्सा बन जाता है यह पेंट

जायडेक्स ग्रुप के एमडी डॉ. मौलिक रांका के अनुसार, पारंपरिक पेंट समय के साथ पपड़ी बनकर उतरने लगते हैं और आग लगने पर तुरंत जल जाते हैं। इसके विपरीत, मिनरल पेंट कंक्रीट या प्लास्टर के साथ पूरी तरह से मर्ज हो जाता है।

  • यह पेंट पुतने के बाद दीवार का ही एक हिस्सा बन जाता है।
  • न तो यह कभी पपड़ी बनकर झड़ता है और न ही आग को आगे बढ़ने देता है।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात, यह हादसे के वक्त जहरीला धुआं नहीं बनाता, जिससे घर में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए अतिरिक्त और कीमती समय (Golden Time) मिल जाता है।

स्मार्ट चॉइस

खूबसूरती के साथ-साथ परिवार की सुरक्षा सर्वोपरि है। अगली बार जब आप घर में पेंट कराने का बजट बनाएं, तो सिर्फ रंगों पर नहीं, बल्कि उसकी फायर-सेफ्टी रेटिंग पर भी ध्यान दें। सिलिकेट मिनरल पेंट जैसे सुरक्षित विकल्प चुनकर आप अपने आशियाने को असल मायनों में ‘सुरक्षित’ बना सकते हैं।

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