अमृतसर: ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी पर शुक्रवार को अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में खालिस्तान समर्थक नारे लगाए गए और जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टर लहराए गए। श्री अकाल तख्त साहिब के पास जुटे कुछ संगठनों और समर्थकों ने भिंडरावाले तथा ऑपरेशन के दौरान मारे गए लोगों की स्मृति में विशेष अरदास की। इस दौरान परिसर में “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे भी सुनाई दिए। बरसी को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्वर्ण मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में पंजाब पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी। सुरक्षा एजेंसियां पूरे कार्यक्रम पर नजर बनाए रहीं।
क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार
ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा 1 से 8 जून 1984 के बीच चलाया गया सैन्य अभियान था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके हथियारबंद समर्थकों को बाहर निकालने के लिए कार्रवाई की थी। 6 जून 1984 को इस अभियान के दौरान भिंडरावाले की मौत हो गई थी। अभियान में अकाल तख्त को भी भारी क्षति पहुंची थी, जिसके कारण यह घटना आज भी पंजाब और सिख समुदाय के लिए बेहद संवेदनशील विषय बनी हुई है।
कौन था जरनैल सिंह भिंडरावाले
मोगा जिले के रोडे गांव में जन्मे जरनैल सिंह भिंडरावाले दमदमी टकसाल के प्रमुख और 1980 के दशक के सबसे चर्चित तथा विवादास्पद सिख नेताओं में से एक थे। शुरुआत में उन्होंने धार्मिक प्रचारक के रूप में पहचान बनाई, लेकिन बाद के वर्षों में पंजाब में बढ़ते उग्रवाद और अलगाववादी राजनीति के केंद्र में आ गए। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उन्होंने स्वर्ण मंदिर परिसर में डेरा जमा लिया था, जिसके बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया।

आज भी संवेदनशील बना हुआ है मुद्दा
बरसी के अवसर पर हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न संगठनों के लोग स्वर्ण मंदिर पहुंचते हैं। शुक्रवार को हुई नारेबाजी ने एक बार फिर यह दिखाया कि ऑपरेशन ब्लू स्टार और उससे जुड़े घटनाक्रम आज भी पंजाब की राजनीति और सामाजिक विमर्श में गहरे प्रभाव रखते हैं। प्रशासन ने हालांकि पूरे कार्यक्रम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखी और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
