राज्यसभा चुनाव: झारखंड में बढ़ा सियासी पारा, JMM ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का किया एलान

"झारखंड राज्यसभा चुनाव में JMM का 'डबल दांव': प्रेशर पॉलिटिक्स या जीत का पक्का भरोसा?"

Johar News Times
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झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सीएम आवास पर हुई एक हाईलेवल बैठक के बाद सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है। जेएमएम ने साफ कर दिया है कि वह राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस अहम बैठक के बाद सूबे के मंत्री हफ़ीजुल हसन अंसारी और मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने मीडिया से औपचारिक बातचीत की। दोनों मंत्रियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि झामुमो दोनों ही सीटों पर पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगा। जेएमएम के इस बड़े एलान के बाद झारखंड के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

महागठबंधन के भीतर नए समीकरणों की आहट

जेएमएम के इस अप्रत्याशित फैसले के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। राजनीतिक हलकों में अब इस बात को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है कि जेएमएम के इस एकतरफा एलान पर सहयोगी दल कांग्रेस का क्या रुख होगा। गौरतलब है कि राज्यसभा सीटों के लिए अमूमन सहयोगी दलों के बीच आपसी सहमति से ही चेहरे तय किए जाते रहे हैं, लेकिन जेएमएम के इस कदम ने कांग्रेस को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

प्रेशर पॉलिटिक्स या संख्या बल का भरोसा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेएमएम के इस कदम के दो मायने हो सकते हैं। पहला यह कि पार्टी इस रणनीति के जरिए सहयोगी दलों पर दबाव बनाना चाहती है। दूसरा यह कि जेएमएम विधानसभा में अपने मौजूदा संख्या बल और सियासी गणित के भरोसे दोनों सीटों पर फतह हासिल करने का पूरा दम देख रही है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जेएमएम की इस ‘गुगली’ पर कांग्रेस और विपक्षी दल (भाजपा) अपनी क्या रणनीति तैयार करते हैं। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में शह-मात का यह खेल और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।

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