सरायकेला-खरसावां के समाहरणालय सभागार में ‘पंचायत उपबंध झारखंड नियमावली, 2025’ विषय पर ग्लोबल पंचायत राउंड टेबल कॉन्क्लेव का भव्य आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा ने की। कार्यक्रम में निदेशक DRDA श्री अजय तिर्की, निदेशक ITDA श्रीमती उषा मुंडू, जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री गोपी उरांव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रभारी जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री गोपी उरांव ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि पेसा नियमावली, 2025 के सफल संचालन के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और आम समुदाय के बीच इसकी सही समझ विकसित करना बेहद जरूरी है। इस कॉन्क्लेव का मकसद सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कानून को धरातल पर उतारना है।
ग्रामसभा की शक्तियों और अधिकारों पर विस्तृत चर्चा
कार्यशाला में मौजूद राज्य स्तरीय प्रशिक्षक ने पेसा नियमावली, 2025 के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि:
- अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए ग्रामसभा की क्या भूमिका है।
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय विकास योजनाओं में सामुदायिक भागीदारी को कैसे सुनिश्चित किया जाए।
- ग्रामसभा की निर्णय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और स्वतंत्र बनाने के क्या नियम हैं।
जागरूकता की कमी और भ्रांतियों को दूर करना जरूरी: उप विकास आयुक्त
अपने अध्यक्षीय संबोधन में उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा ने कहा, “पेसा कानून को लेकर जनता में भारी उत्साह है, लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ भ्रांतियां भी फैली हुई हैं। कानून के सफल क्रियान्वयन के लिए सही और तथ्यात्मक जानकारी का प्रचार-प्रसार होना अनिवार्य है।”
उन्होंने आगे कहा कि ग्राम प्रधान और ग्रामसभा स्थानीय स्वशासन की रीढ़ हैं। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे पेसा नियमावली के हर बिंदु को गहराई से समझें और अपने-अपने कार्यक्षेत्र में इसे सख्ती से लागू करें। बिना अंतर-विभागीय समन्वय के इस कानून की मूल भावना को लागू नहीं किया जा सकता।
सिविल सोसाइटी की भूमिका की सराहना
DDC ने जागरूकता फैलाने और भ्रांतियों को दूर करने में जुटे सिविल सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन और सहयोगी संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाएं ताकि ग्रामीण समुदाय अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सके।
सवाल-जवाब सत्र से हुआ शंकाओं का समाधान
कार्यक्रम के अंतिम चरण में उपस्थित पंचायत प्रतिनिधियों और हितधारकों से पेसा नियमावली के व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर सुझाव मांगे गए। इस दौरान प्रतिभागियों ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए, जिनका राज्य स्तरीय प्रशिक्षक द्वारा विस्तार से जवाब देकर समाधान किया गया। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रामसभा को सशक्त बनाने और जागरूकता फैलाने के संकल्प के साथ हुआ।
