झारखंड आंदोलन के मूल मुद्दों को लेकर राज्य में एक बार फिर सड़कों पर हलचल तेज हो गई है। ‘माय-माटी-मान’ की लड़ाई और ‘दो जून की रोटी’ की मांग को लेकर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने 10 जून 2026 से राजधानी रांची में मुख्यमंत्री आवास के अनिश्चितकालीन घेराव का ऐलान किया है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान प्रदर्शन, आमरण अनशन और जरूरत पड़ने पर आत्मदाह जैसे उग्र कदम भी उठाए जाएंगे।
यह निर्णय गिरिडीह जिला स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन में आयोजित मोर्चा की जिला स्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता पोलूस हंसदा ने की और संचालन ओमप्रकाश महतो ने किया। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो, महासचिव विनोद पांडे और सचिव सूरज प्रसाद जायसवाल समेत कई दिग्गज नेता मौजूद थे।
बैठक में सरकार के सामने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एक 10 सूत्री मांग पत्र जारी किया गया है, जो इस प्रकार है:
- सभी झारखंड आंदोलनकारियों को राजकीय मान-सम्मान और अलग पहचान मिले। जेल जाने की बाध्यता को खत्म कर सभी को प्रति माह 50-50 हजार रुपये सम्मान पेंशन दी जाए।
- आंदोलनकारियों के पुत्र-पुत्री और आश्रितों को सरकारी नौकरियों में सीधी बहाली का लाभ मिले।
- गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिशोम गुरु शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलनकारी का सर्वोच्च सम्मान दिया जाए।
- छूटे हुए मूल आंदोलनकारियों की पहचान के लिए आयोग कार्यालय का फिर से गठन हो।
- झारखंडी भाषा, संस्कृति और अलग राज्य के मूल मूल्यों की रक्षा की जाए।
- संविधान की धारा 3 के उल्लंघन पर तुरंत रोक लगे।
- राज्य के युवाओं के जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र बिना किसी भ्रष्टाचार के आसानी से बनाए जाएं।
- राज्य में सीएनटी-एसपीटी एक्ट और पांचवीं अनुसूची का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित हो।
- कटहल टोली, डेला टोली, चड़री, सिरम टोली जैसी राज्य की मूल ऐतिहासिक टोलियों को मिटाने की साजिश पर रोक लगे। साथ ही, राज्य विरोधियों की प्रतिमाएं या पोर्ट्रेट लगाने पर पाबंदी हो।
- सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक ‘समता जजमेंट’ के तहत राज्य को मिलने वाली 26 प्रतिशत रॉयल्टी का हक और अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
बैठक को संबोधित करते हुए आंदोलनकारी नेताओं ने तीखे तेवर अपनाए। नेताओं का कहना था:
“झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए हजारों लोगों ने अपनी कुर्बानियां दीं। आज स्थिति यह है कि मूल झारखंडियों की आबादी घट रही है और हमारी माय-माटी को लूटा जा रहा है। हमने सरकार से कई बार गुहार लगाई, लेकिन हमारी मांगें अधूरी हैं। अब हमारे सब्र का बांध टूट चुका है, 10 जून से आर-पार की लड़ाई होगी।”
मोर्चा ने राज्यभर के झारखंडियों और आंदोलनकारियों से अपील की है कि वे अपनी अस्मिता और हक की इस लड़ाई के लिए 10 जून को भारी संख्या में रांची पहुंचें।
