झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र में अवैध देशी महुआ शराब का काला कारोबार इन दिनों अपने चरम पर है। इलाके के ढागौरडीह, महतोडीह, हुंडरू, पाथरडीह, चिगड़ा, पाड़कीडीह, मुरु, हेवन, चातरमा, जुगीलांग, पूड़ीयारा और लॉकडी समेत दर्जनभर से अधिक गांवों में शराब माफियाओं ने पैर पसार लिए हैं। इन इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध महुआ भट्ठियों का संचालन बेखौफ होकर किया जा रहा है।
रोज धू-धू कर जल रही हैं हजारों टन लकड़ियां, पर्यावरण को भारी नुकसान स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, इन अवैध मिनी भट्ठियों में ‘देसी स्टाइल’ से महुआ शराब की चुलाई की जा रही है। शराब भट्टी की आग को धधकाने के लिए प्रतिदिन आस-पास के जंगलों से काटकर लाई गई हजारों टन लकड़ियों को झोंका जा रहा है। इसके कारण क्षेत्र के हरे-भरे जंगल तेजी से उजाड़ हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।
उत्पाद विभाग और प्रशासन को खुली चुनौती एक तरफ जहां जिला उत्पाद विभाग समय-समय पर अवैध शराब के खिलाफ छापेमारी का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर माफिया विभाग को खुली चुनौती दे रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि उत्पाद विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन की घोर अनदेखी के कारण ही यह अवैध धंधा फल-फूल रहा है। स्थिति यह हो गई है कि लोग अब विभाग और माफियाओं के बीच साठगांठ का आरोप लगाने लगे हैं।
NH के रास्ते जमशेदपुर तक हो रही है महा-सप्लाई सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, नीमडीह के इन जंगलों और गांवों में तैयार होने वाली जहरीली महुआ शराब की बड़ी खेप जमशेदपुर समेत आस-पास के कई शहरी इलाकों में सप्लाई की जा रही है। तस्कर बाइक और फोर-व्हीलर गाड़ियों के जरिए नेशनल हाईवे पर दिन-दहाड़े शराब की बड़ी खेप लेकर दौड़ रहे हैं। इस अवैध नशे की वजह से इलाके के कई गरीब किसान और दैनिक वेतनभोगी मजदूर दलदल में फंसकर अपना परिवार बर्बाद कर चुके हैं, जबकि माफिया मोटी कमाई कर मालामाल हो रहे हैं।
रसूखदार नेता का संरक्षण, उच्चस्तरीय जांच की मांग इस पूरे खेल के पीछे राजनीतिक सांठगांठ की भी बू आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इस सिंडिकेट को क्षेत्र के एक रसूखदार नेता का मौन संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से स्थानीय पुलिस और प्रशासन हाथ डालने से कतराते हैं। त्रस्त ग्रामीणों ने अब इस पूरे अवैध नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच कराने और बड़े माफियाओं को जेल भेजने की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक किंगपिन पर हाथ नहीं डाला जाएगा, तब तक ये भट्ठियां बंद नहीं होंगी।
