सुरदा खदान में ठेका कंपनी के खिलाफ श्रमिकों का मोर्चा, 26 जून के बाद उलगुलान आंदोलन की चेतावनी

Johar News Times
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हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की सुरदा खदान में कार्यरत ठेका कंपनी आर.के. अर्थ प्राइवेट लिमिटेड कंस्ट्रक्शन के खिलाफ श्रमिकों और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेताओं ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। रविवार को सुरदा बाजार में आयोजित ठेका कर्मियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में कंपनी प्रबंधन पर मजदूरों के शोषण, दमन और श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए।

बैठक को संबोधित करते हुए झामुमो नेता बाघराय मार्डी ने कड़े शब्दों में कहा कि कंपनी की कथित शोषणकारी नीतियां अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने प्रबंधन को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो 26 जून के बाद पूरे क्षेत्र में एक जोरदार ‘उलगुलान आंदोलन’ शुरू किया जाएगा।

प्रतिकूल हालात में काम करने को मजबूर हैं श्रमिक, स्वास्थ्य पर खतरा

सुरदा खदान के ठेका कर्मी सायबा हेंब्रम ने खदान के भीतर की जमीनी हकीकत बयां करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि खदान के अंदर वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) की व्यवस्था बेहद खराब है। इसके कारण मजदूरों को दमघोंटू घने धुएं और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बेहद गंभीर और जानलेवा असर पड़ रहा है।

श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि:

  • अतिरिक्त काम, कम दाम: मजदूरों से तय समय से ज्यादा अतिरिक्त कार्य (ओवरटाइम) कराया जाता है, लेकिन उन्हें उसके अनुरूप उचित वेतन नहीं दिया जाता।
  • सुरक्षा में चूक: खदान के भीतर बिजली बाधित होने या बत्ती गुल होने की स्थिति में सुरक्षा के कोई पर्याप्त वैकल्पिक इंतजाम नहीं हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

छुट्टियों और श्रम अधिकारों में धांधली का आरोप

बैठक में मौजूद श्रमिकों ने कंपनी पर उनके बुनियादी श्रम अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया। मजदूरों का कहना है कि कंपनी द्वारा कैजुअल लीव (CL), अर्जित अवकाश (Earned Leave) और मेडिकल अवकाश (Medical Leave) के मामलों में भारी अनियमितता बरती जा रही है। श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का कंपनी प्रबंधन सही तरीके से पालन नहीं कर रहा है।

चाईबासा श्रम विभाग से जांच और कार्रवाई की मांग

अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित मजदूरों ने चाईबासा स्थित संबंधित श्रम अधिकारियों और डीजीएम (DGM) से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि सुरदा खदान में सरकारी श्रम कानूनों को सख्ती से लागू कराया जाए।

दूसरी ओर, झामुमो नेता बाघराय मार्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 26 जून तक श्रमिकों की मांगों पर प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। सुरदा खदान में पहले से ही चल रहे उत्पादन और परिवहन विवाद के बीच श्रमिकों की इस नई नाराजगी ने कंपनी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के लिए एक और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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